मंदसौर। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. चौहान ने वर्षा ऋतु में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बचाव और उपचार संबंधी एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि सांप के काटने पर त्वचा पर सूजन, फफोले, खून बहना, पलकों का न खुलना, उल्टी, बेहोशी, धुंधलापन, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डॉ. चौहान ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द प्राथमिक, सामुदायिक, सिविल या जिला अस्पताल में पहुंचाएं। पीड़ित को दौड़ने या तेज चलने न दें, सर्पदंश वाली जगह से जूते, अंगूठी, घड़ी जैसे तंग वस्त्र या आभूषण हटा दें। अंग को स्थिर रखें व किसी भी नुकीली वस्तु से काटने की कोशिश न करें और न ही ज़हर चूसने का प्रयास करें।
उन्होंने बताया कि यदि पीड़ित को 100 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाया जाए तो शत-प्रतिशत बचाव संभव है। जानकारी के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत सांप विषैले नहीं होते, और विषैले सांपों में भी केवल 50 प्रतिशत मामलों में ही विष का प्रभाव होता है।
वर्षा ऋतु में सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती हैं, इसलिए किसानों को खेतों में काम करते समय पूरे जूते पहनने और बैटरी लाइट साथ रखने की सलाह दी गई है। जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।