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July 3, 2025, 10:33 am
KHABAR : मोहर्रम इस्लामी वर्ष यानी हिजरी वर्ष का पहला महीना, चांद दिखते ही शुरू मोहर्रम, इमाम हुसैन की याद में बनाए जाते हैं ताजिए, पढे़ अबरार पठान की खबर 

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खरगोन। मोहर्रम इस्लामी वर्ष यानी हिजरी वर्ष का पहला महीना है। हिजरी वर्ष का आरंभ इसी महीने से होता है। इस माह को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस माह को अल्लाह का महीना कहा है। मोहर्रम के दौरान हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजीया  बनाया जाता है जिसे बांस की किमची और रंग-बिरंगे कागजों से सजाया जाता है। 


ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के भारत आने के बाद उन्होंने अजमेर में एक इमामबाड़ा बनाया और उनके ताजिए रखने की जगह भी बनाई जिससे भारत में ताजिया की प्रथा और अधिक प्रचलित हुई खरगोन जिले के कसरावद तहसील में भी मोहर्रम का चांद देखते  ही ताजिया बनाना शुरू हो जाता है जिसमें शहर में छोटे-बड़े मिलाकर 60 से 70 ताजा बनते हैं जिसे मोहर्रम की 10 तारीख से पहले बनाना शुरू कर देते हैं ताजिए बनाने का काम बड़ा ही मेहनत एवं बारीकी का काम होता है 5 से 7 लोग लगातार मेहनत करते हैं तब ताजिए का निर्माण होता है। 


कसरावद मे जामा मस्जिद मोहल्ले, सूफी मस्जिद, मोहल्ला गुलशन मोहल्ला, नया नगर, बाबा की पहाड़ी एवं पूरे शहर में ताजिया बनाए जाते हैं जिसमें शहर का सबसे बड़ा ताजिया मक्कानी होता है जो पूरे शहर का होता है वही जमा मस्जिद मोहल्ला में इरफान खान द्वारा करीब 20 साल से ताजिया बनाया जाता है जो बड़ी मेहनत और लगन से ताजिया बनाते हैं। मोहर्रम महीने की 9 तारीख को की जाने वाली इबादत का बड़ा महत्व होता है इस  दिन लोग रोजा भी रखते हैं। 

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