हरदा। मध्य प्रदेश के कई जिलों में मक्के की खेती के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। हरदा जिले में भी किसानों ने खरीफ सीजन में किसानों ने सोयाबीन (पीला सोना) और मक्का बोया है। लेकिन इस बार ज्यादातर किसानों का झुकाव मक्का की खेती की ओर है। लेकिन किसानों को काली इल्ली (ब्लैक इल्ली) का डर सता रहा है। यह प्रकोप ज्यादातर मक्का की खेती करने वालों किसानों के लिए चिंता का विषय है।
दरअसल, मक्का की फसल इल्लियों के लिए मीठी फसल होती है, क्योंकि उसमें शर्करा पाया जाता है, जिसके कारण इल्ली मक्का की फसल को जड़ से साफ कर देती है। पूरे जिले मे सोयबीन का रकबा 1 लाख 12 हज़ार हेक्टेयर का है, जिसमें सोयाबीन बोई गई है। वहीं, मक्का का रकबा 48 हज़ार हेक्टेयर है। मक्का की फसल लगभग जिले के किसानों ने आधे रकबे में बोई है। अगर यह इल्ली का प्रकोप बढ़ गया तो यह किसानों को बहुत नुकसान उठाना पढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों से जांच कराएंगे
डीडीए कृषि जवाहरलाल कास्दे ने कहा कि विभाग का क्षेत्रीय अमला और वैज्ञानिकों द्वारा मौके पर जांच कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा लगातार कैंपेन चलाकर किसानों को जागरुक किया।
सरकार कराए मक्का की फसल का बीमा
किसानों की समस्याओं को देखते हुए किसान एवं नेता मोहन विश्नोई ने भी चिंता जाहिर की है. वहीं कृषि विभाग को किसानों के खेतों का निरीक्षण करने की बात कहते हुए कहा कि मक्का की फसल इस बार पूरे जिले में किसानों के द्वारा सबसे ज्यादा बोई गई है. जिसके कारण अगर यह इल्ली का प्रकोप नहीं रुका तो सरकार को किसानों को मुआवजा देने के लिए बाध्य होना चाहिए एवं मक्का की फसल का बीमा सरकार को करवाना चाहिए. यहीं तक नहीं बल्कि किसानों की मक्का की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहिए।