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July 4, 2025, 2:32 pm
KHABAR : सुप्रीम कोर्ट ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सीएस से मांगा एफिडेफिट, ​​​​​​​पूछा- 13 प्रतिशत पद होल्ड हैं, इन पर नियुक्तियों में क्या दिक्कत है, पढे़ खबर 

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भोपाल। एमपी में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से एफिडेफिट मांगा है कि जो 13 प्रतिशत पद होल्ड हैं, उन पर नियुक्तियों में क्या दिक्कत है। सरकार ने साल 2019 में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक्ट पास किया गया था, लेकिन अमल में नहीं आ पाया।


कोर्ट नंबर 12 में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच में सुनवाई की। यह केस सीरियल नंबर-35 पर लगा था। कोर्ट में एक बार फिर से मप्र में ओबीसी की आबादी 51 प्रतिशत होने की दलील दी गई, लेकिन 27 फीसदी आरक्षण लागू करने का आदेश देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। यह सामने आया कि मामले में मप्र हाईकोर्ट से ट्रांसफर होकर करीब 70 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पहुंची हैं, उन्हीं पर आगे सुनवाई होगी। तत्काल आरक्षण देने संबंधी इस याचिका में अभी कोई राहत नहीं मिली है।


वकील ने कहा- पुराने आदेश का हवाला देकर बच रही सरकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने एक बार फिर कहा कि एक्ट पास होने के बाद भी उम्मीदवारों को पांच साल से 27 फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है। सरकार 19 मार्च 2019 के हाईकोर्ट के एक पुराने अंतरिम आदेश का हवाला देकर आरक्षण से बच रही है। जबकि एक्ट पर कोई रोक नहीं है। इसे लागू किया जाए।


इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस की बात कही थी
इसके पहले 25 जून की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने वकील से ही पूछा था कि इंदिरा साहनी केस क्या है? इसमें आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की हुई है। इस पर वकील ने कहा था कि मप्र में ओबीसी की आबादी 51 फीसदी है, लेकिन नौकरियों में केवल 13.66 फीसदी आरक्षण है। इसलिए सरकार ने 27 फीसदी का एक्ट पास किया और इस पर कोई स्टे नहीं है। केवल विधिक सलाह के बाद एक नोटिफिकेशन से इस आरक्षण को देने से रोक दिया गया। सरकार ने 87-13 फीसदी का फॉर्मूला लगा दिया। चार-पांच साल से यह 13 फीसदी आरक्षण रुका हुआ है।

 

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