इंदौर। जनसंघ के संस्थापक और युगपुरुष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर रविवार को इंदौर के विजयनगर स्थित उनकी प्रतिमा पर भाजपा नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्णमुरारी मोघे, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और विधायक रमेश मेंदोला ने माल्यार्पण कर डॉ. मुखर्जी को नमन किया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिद्धांतों के लिए जीने वाले नेता थे। उन्होंने देशहित को सर्वाेपरि मानते हुए उस समय विधायकी का पद भी छोड़ दिया। वे पहले हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष बने, लेकिन जब उनके प्रस्ताव को संगठन ने नहीं माना, तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
साल 1946 में ही उन्हें देश के विभाजन का अंदेशा हो गया था, इसलिए उन्होंने बंगाल में सक्रिय होकर हिंदू बहुल क्षेत्रों को भारत में बनाए रखने के लिए आंदोलन शुरू किया। उनका संघर्ष ही है कि आज पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है। जो पंजाब और बंगाल आज भारत में बचे हैं, वह डॉ. मुखर्जी के प्रयासों की ही देन है।भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कहा था दृ“एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।”भाजपा सरकार ने इस संकल्प को साकार किया। उन्होंने कहा, “जब हम अनुच्छेद 370 हटाने की बात करते थे, तो लोग हम पर हंसते थे। लेकिन हमारी सरकार ने इसे भी पूरा कर दिखाया। राम मंदिर पर लोग तारीख पूछते थे, आज तारीख भी आ गई और अयोध्या में मंदिर बनकर तैयार हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि हमारा हर कार्यकर्ता इस लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत फिर से विश्व गुरु बने।