नीमच। जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने अपने लंबित मानदेय भुगतान, अनुचित कार्यों के विरोध और पूर्व घोषित मांगों को पूरा करने के लिये मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और विधायक दिलीप सिंह परिहार को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं। आशा एवं सुपरवाइजर कर्मचारी महासंघ, मध्यप्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष भारती सोलंकी और जिला अध्यक्ष श्यामा रावत ने बताया कि मार्च 2025 से आशा कार्यकर्ताओं का पूरा मानदेय नहीं दिया गया है और उन्हें हर महीने आंशिक भुगतान मिल रहा है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। आशा कार्यकर्ता पूरी तरह से अपने मानदेय पर निर्भर हैं और इसमें अनियमितता उनके जीवनयापन को मुश्किल बना रही है।
ज्ञापन में स्वस्थ यकृत मिशन के तहत आशा कार्यकर्ताओं को पुरुषों की कमर का माप लेने के लिए घर-घर जाने के निर्देश का कड़ा विरोध किया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कार्य महिलाओं के लिए उचित नहीं है और इससे छेड़छाड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने इस कार्य को तत्काल बंद करने और इसे पुरुष कर्मचारियों से करवाने की मांग की है। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में 06 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं को याद दिलाया गया है। इन घोषणाओं में प्रति वर्ष 1000 की मानदेय वृद्धि और सेवानिवृत्ति की कोई आयु सीमा न होना शामिल था। कार्यकर्ताओं ने खेद व्यक्त किया कि इन घोषणाओं पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए मुख्यमंत्री और विधायक से उम्मीद जताई है कि इनका शीघ्र निराकरण किया जाएगा।