मनासा (नीमच)। वनमंडल अधिकारी (डीएफओ) एसके अटोदे ने ग्राम भाटखेड़ी स्थित मिनी जंगल ष्विश्वकर्मा बैंबू फार्मष् एवं औषधीय वाटिका का निरीक्षण किया। यह फार्म प्रगतिशील किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा द्वारा ष्राष्ट्रीय बांस मिशन योजनाष् के तहत विकसित किया गया है। निरीक्षण के दौरान डीएफओ अटोदे ने फार्म पर बांस की खेती, जैविक खेती और औषधीय पौधों के नवाचारों की सराहना की।
अटोदे ने कहा कि यह फार्म जैव विविधता के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है। जैविक खेती के चलते यहां पक्षियों और तितलियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बटरफ्लाई गार्डन में चार से पांच प्रजातियों की तितलियां देखने को मिलीं। उन्होंने स्वयं फार्म पर पीले पलाश का एक पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। डीएफओ ने बताया कि यह स्थल अब पर्यटन का आकर्षण केंद्र बनता जा रहा है। लोग यहां घूमने, पिकनिक मनाने और फोटोशूट के लिए भी आ रहे हैं।
औषधीय वाटिका में मौजूद प्रमुख औषधीय पौधे-
गिलोय, कौंचबीज, शतावरी, अश्वगंधा, सर्पगंधा, नीली व सफेद अपराजिता, हड़जोड़, गटारन, चक्रमर्द, नामी, छोटी व बड़ी दूधी, चित्रक, गुड़हल, पत्थरचट्टा, एलोवेरा, मीठा नीम, वराहीकंद, स्वॉर्ड बीन्स, ट्राइडेक्स, वज्रदंती, लक्ष्मणफल, रामफल और सीताफल आदि। अटोदे ने कमलाशंकर विश्वकर्मा द्वारा किए जा रहे नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी हैं।