प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला न्यायालय ने मंदसौर के 4 पुलिसकर्मियों सहित 7 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए। इनमें से 4 पुलिसकर्मी भावगढ़ थाने में पदस्थ रहे हैं जिन पर शराब का फर्जी केस बनाने, हथियार बताकर धमकाने समेत अन्य आरोप भी लगे। आरोपी पक्ष ने कोर्ट की शरण ली और तथ्य रखे। इसके बाद उक्त आदेश दिए गए।
भावगढ़ थाने में पदस्थ रहे एएसआई सुरेशकुमार निमामा, आरक्षक देवेंद्रकुमार लबाना, करणसिंह, यशवंत चौहान व थाने में कार्यरत संविदाकर्मी मुकेश कुमावत के साथ 2 अज्ञात लोगों समेत कुल 7 को आरोपी बनाया गया है। प्रकरण में भीलवाड़ा जिले के आकड़सादा निवासी पारसमल मेवाड़ा कलाल ने कोर्ट में मामला रखा था। इसमें बताया कि उनकी बेटी सरोज के नाम से प्रतापगढ़ के ग्राम खेरोट में सरकारी शराब दुकान का लाइसेंस है। उस दुकान से संबंधित गोदाम ग्राम बरखेड़ा के अखेपुर रोड पर है। 10 फरवरी 2025 को आबकारी गोदाम से ड्राइवर दशरथ मीणा वाहन क्रमांक आरजे-35-यूए-0639 से विधिवत चालान की राशि जमा कराकर शराब की 85 पेटी गोदाम में रखने जा रहा था। इस बीच अखेपुर गांव के पास बाइक सवार 2 अज्ञात लोगों ने चाकू-पिस्टल दिखाकर ड्राइवर को उतारा और धमकाकर भगा दिया। मुझे (पारस) जबरन कीडनैप कर थार वाहन से अपने साथ ले गए। यहां से एमपी के भावगढ़ थाना क्षेत्र के नंदावता में पुलिसकर्मियों ने उक्त दोनों आरोपियों के साथ मिलकर षडयंत्रपूर्वक 85 पेटी शराब का झूठा मुकदमा दर्ज किया। इन पुलिसकर्मियों में एएसआई सुरेशकुमार निमामा, आरक्षक देवेंद्रकुमार लबाना, करणसिंह, यशवंत चौहान, भावगढ़ थाने में कार्यरत संविदाकर्मी मुकेश कुमावत शामिल थे। इस मामले में हाईकोर्ट इंदौर से जमानत हुई थी। प्रकरण के बाद पारसमल ने कोर्ट में प्रतापगढ़ डिपो के इनवाइस, निर्धारित रूट, घटना के समय मोबाइल नंबरों की फोन लोकेशन जैसे कई विषय रखे। इसके बाद कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए।