सरवानियां महाराज। साल दर साल प्रकृति का दंश झेलने वाले किसान के चेहरे पर इस बार लहलहाती फसलों को देखकर खुशी छलक रही है ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि किसान फसलें बोने के बाद खुश नज़र आये।
खरीफ़ सीजन फसल 2025 की इस बार शुरुआत बहुत शानदार मानी जा रही है। इस बार के आंकड़े बताते हैं कि कृषकों ने मुंगफली और मक्का की और अधिक रुख किया है जिसके चलते कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मक्का और मूंगफली का रकबा बड़ा है। सरकार ने खरीफ़ सीजन की लगभग चोदह तरह की फसलों पर एमएसपी घोषित की है जिनमें धान अरहर मूंग भी शामिल हैं।
अंचल में खरीफ़ सीजन की फसलें लगभग उन्नीस दिन की हो गई है। अधिकांश कृषकों ने उन्नत तकनीक से उपचारित बीजों की बुआई की है। बोई गई फसल की दो बार करपाई कर दी गई है और हाल फिलहाल बोई गई सभी फसलें अच्छी स्थिति में है छोटी मोटी इल्ली की खबरें हैं जिनपर कृषि विशेषज्ञों कि सलाह पर दवाई छिड़काव कर रहे हैं। कृषक सुरेश मालू ने बताया कि इस अंचल में सोयाबीन की फसल पिछले साल की तुलना में कम बोई गई है। किसानों ने सोयाबीन की घटती पैदावार को देखते हुए इस बार मक्का की फसल भी बड़ी मात्रा में लगाई है इसके साथ ही मूंगफली भी अच्छी खासी मात्रा में बोई गई है। उड़द मूंग चंवला की फसलें बहुत कम मात्रा में लगाई गई है। फसलें अच्छी स्थिति में खड़ी हैं।
अंचल में किसानों ने 20 जून से बोवनी शुरू कर दी थी जो लगभग दो तीन दिन तक चली थी इस हिसाब से अंचल में औसतन खरीफ़ सीजन की फसलें अठारह उन्नीस दिन की हो गई है। कुछ किसानों ने 18 जून को बोवनी कर दी थी।
सोयाबीन रकबा घटा मक्का बड़ा-
इस बार खरीफ़ सीजन में सोयाबीन की फसल की बोवनी पिछले सालों की तुलना में कम की गई है जिसमें कृषकों का तर्क है कि बार बार सोयाबीन की फसल रिपीट होने से अब उत्पादन घट गया है और लागत मुल्य और आय मुल्य में अब बहुत कम अंतर रह गया है जिसके कारण अधिकांश कृषकों ने यूं टर्न लेकर मक्का की फसल लगाई है। इस बार मक्का का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। सरवानियां महाराज पटवारी हल्का रिकॉर्ड अनुसार लगभग 700 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि पर बोवनी की गई है। यंहा पटवारी हल्का में लगभग 1100 हेक्टेयर भूमि जिसमें शासकीय भूमि भी शामिल हैं।