भिंड। पूर्व आईएएस और लेखक राजीव शर्मा को रविवार शाम नई दिल्ली में आयोजित इंडिया इंटेलेक्चुअल कॉनक्लेव में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह उपाधि उन्हें इटली के क्यूनो विश्वविद्यालय ने प्रदान की। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हैबिटैट सेंटर में किया गया, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधियों और भारत की प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया।
राजीव शर्मा मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड शहर के रहने वाले हैं। शहडोल संभाग के आयुक्त पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वे भिंड में समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। विशेष रूप से वे युवाओं को रोजगार और नेतृत्व के क्षेत्र में मार्गदर्शन दे रहे हैं।
फुटबॉल क्रांति की शुरुआत, अब बना राज्यव्यापी आंदोलन
आईएएस रहते हुए राजीव शर्मा ने ‘फुटबॉल क्रांति’ की नींव रखी, जिसके तहत आदिवासी और ग्रामीण युवाओं को फुटबॉल के माध्यम से नशा, बेरोजगारी और हताशा से बाहर निकाला गया। यह अभियान आज चंबल से महाकौशल तक फैला हुआ है। ‘फुटबॉल क्रांति फाउंडेशन’ के जरिए प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने की प्रशंसा
राजीव शर्मा की इस पहल की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ‘मन की बात’ में कर चुके हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी स्पेन में आयोजित वैश्विक मंच पर इसका उल्लेख करते हुए इसे ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ बताया था।
कई देशों के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय विशेषज्ञ सम्मेलन में शामिल
इस सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, रूस, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और इटली के प्रतिनिधियों के साथ उत्तरप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री प्रो. दिनेश शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम में न्याय, प्रशासन, सैन्य सेवा और मीडिया के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।
राजीव शर्मा बोले- यह सम्मान युवाओं की जीत है
सम्मान ग्रहण करते हुए राजीव शर्मा ने कहा, “यह डॉक्टरेट सिर्फ मेरी नहीं, उन हजारों युवाओं की जीत है जिन्होंने फुटबॉल को अपने जीवन की दिशा बनाने में भरोसा दिखाया।”