नरसिंहपुर। तहसीलदार 6 अगस्त से राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक कार्यों के विभाजन का विरोध कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने कैबिनेट मंत्री उदयप्रताप सिंह और तेंदूखेड़ा विधायक विश्वनाथ सिंह को ज्ञापन सौंपा।
3 जून 2025 को जारी मंत्री परिषद के आदेश के अनुसार, करीब 1100 राजस्व अधिकारियों में से 500 को उनके मूल कार्यों से हटाकर प्रोटोकॉल, डीडी और शिनाख्तगी जैसे अन्य विभागीय कार्यों में लगाया जाएगा। तहसीलदारों का कहना है कि इससे किसानों को न्याय मिलने में देरी होगी और राजस्व प्रकरणों की पेंडेंसी बढ़ेगी।
तहसीलदारों ने ज्ञापन में कई आपत्तियां उठाई हैं। राजस्व न्यायालयों की संख्या कम होने से किसानों की परेशानी बढ़ेगी। स्टाफ की कमी दूर करने के बजाय न्यायालय कम किए जा रहे हैं। मौजूदा स्टाफ भी कार्य में पारंगत नहीं है।
फील्ड में आदेश पारित करने और उन्हें लागू करवाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आएंगी। राजस्व अधिकारियों का वेतन विभाग को देना होगा, लेकिन जनता को कोई फायदा नहीं मिलेगा। प्रति तहसील एक तहसीलदार और दो नायब तहसीलदार की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।
एकल खिड़की व्यवस्था के बजाय किसानों को दो खिड़कियों पर जाना पड़ेगा। तहसीलदारों को आशंका है कि भविष्य में कानून व्यवस्था की समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। संवर्ग ने किसानों के हित और सुशासन को देखते हुए इस आदेश को रद्द करने की मांग की है।