विदिशा। दिगंबर जैन समाज का दशलक्षण पर्युषण महापर्व आज से शुरू हो गया। शहर के सभी जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। इनमें अभिषेक, शांति धारा और पूजन जैसे कार्यक्रम हुए।
10 दिन 10 व्रतों का करेंगे पालन
पर्व के पहले दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा व्रत का पालन किया। आने वाले दस दिनों में वे नौ और व्रतों का पालन करेंगे, जिनमें उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य शामिल हैं। इन व्रतों का जैन धर्म में विशेष महत्व है।
समाज के पदाधिकारी पंकज जैन ने बताया कि यह महापर्व आत्मसंयम और आत्मकल्याण का प्रतीक है और ’जियो और जीने दो’ का संदेश देता है। इस दौरान जैन धर्म के अनुयायी उपवास, साधना और व्रत करके आत्मसंयम का अभ्यास करेंगे।
वरिष्ठ पदाधिकारी निरंजन पाटनी ने बताया कि इन दिनों समाज के लोग बाहर का भोजन नहीं करेंगे। वे केवल घर का शुद्ध सात्विक भोजन ही ग्रहण करेंगे। सुबह मंदिरों में पूजा-अर्चना और ध्यान होगा, जबकि शाम को महाआरती, भक्तांबर पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।