नीमच। मध्यप्रदेश शासन की योजना के तहत आगामी पांच वर्षों में प्रदेश की दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नीमच जिले में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अमन वैष्णव के मार्गदर्शन में तीन चरणों में क्रियान्वित किया जा रहा है।
पहला चरण: घर-घर संपर्क और ब्याज मुक्त ऋण वितरण-
पहले चरण में 58 हजार केसीसी धारक पशुपालकों से घर-घर संपर्क कर 10,400 पशुपालन केसीसी फार्म भरे गए। इनमें से 5,695 पशुपालकों को अधोसंरचना विकास हेतु 20 करोड़ से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरण किया गया। इस राशि का उपयोग पशु क्रय, पौषण प्रबंधन, पशुशाला निर्माण आदि में किया गया, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई।
दूसरा चरण: नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान-
दूसरे चरण में पशुओं की उच्च गुणवत्ता वाली नस्ल सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया जा रहा है। जिले में अब तक 41 हजार से अधिक पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया, जिनमें से 6,000 पशुओं को सेक्स सार्टेड सीमन लगाया गया है। इसका उद्देश्य उच्च उत्पादन क्षमता वाली बछिया पैदा करना है।
तीसरा चरण: उत्पादित दूध का उचित मूल्य और संग्रहण में वृद्धि-
तीसरे चरण में पशुपालकों को उत्पादित दूध का उचित मूल्य दिलाया जा रहा है। दुग्ध संघ ने प्रति लीटर दूध का मूल्य 7-8 रुपये बढ़ाया। वर्ष 2025-26 में जिले में 12 नवीन दुग्ध समितियाँ खोली गई हैं। दूध संग्रहण क्षमता 14,300 लीटर से बढ़कर 15,100 लीटर प्रतिदिन हो गई है।
दुग्ध उत्पादक सदस्यों की संख्या में 350 से अधिक की वृद्धि हुई है। दो नए मिल्क रूट बनाए गए हैं और बल्क मिल्क कुलर (BMC) की संख्या 9 से बढ़कर 14 कर दी गई है। जिले की 10 दुग्ध संग्रहण समितियाँ पुनर्जीवित की गई हैं। जल्द ही जिले को मोबाइल टेस्टिंग सह BMC भी उपलब्ध होगा।