इंदौर। मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MPSLSA) की ओर से आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस ऑन ‘Enhancing Access to Justice’ का शनिवार को इंदौर में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ सहित सुप्रीम कोर्ट और पश्चिमी क्षेत्र के विभिन्न हाई कोर्ट के न्यायाधीश मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में भारतीय न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए सम्राट विक्रमादित्य का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि न्याय के सिंहासन पर बैठने के बाद राजा के लिए व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर न्याय होता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विक्रमादित्य ने अपने पत्नी के भाइयों के खिलाफ भी रिश्तों से प्रभावित हुए बिना न्याय किया था।
मुख्यमंत्री ने पंच परमेश्वर की परंपरा से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के संवाद के प्रयासों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में न्याय और संवाद की परंपरा प्राचीन काल से रही है। उन्होंने कहा कि विवादों के समाधान के लिए संवाद और न्याय दोनों महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री ने पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की पहल की गई है।
उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का भी उल्लेख करते हुए इसे समानता और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई, जीरो FIR और ‘वन डेटा-वन केस’ जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं से न्याय प्रक्रिया को तेज और सुलभ बनाने पर जोर दिया।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना केवल अदालतों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और प्रो-बोनो लीगल सर्विस को नैतिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की अपील की।
कॉन्फ्रेंस में न्याय तक आम नागरिक की पहुंच, गरिमा, संवाद और समावेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के कई न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए।