निम्बाहेड़ा। शहर में ऐतिहासिक चालीसवां मोहर्रम गुरुवार को अकीदत, एहतराम और रूहानियत के माहौल में मनाया गया। ‘या हुसैन’ की सदाओं से पूरा शहर गूंज उठा। राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों जायरीनों की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य बना दिया।
मोहर्रम कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार, रात्रि करीब 11 बजे मुकाम से जुलूस रवाना हुआ। जुलूस कोतवाली थाना परिसर के पीछे से साजन लस्सी वाली गली, सब्जी मंडी चौराहा, शास्त्री मार्केट, कैंची चौराहा एवं चित्तौड़ी दरवाजा होते हुए अंजुमन चौक पहुंचा। यहां रात्रि करीब 2 बजे शहर के सभी ताजिये एकत्रित हुए। अकीदतमंदों की मौजूदगी में सलामी की रस्म पूरे अदब और एहतराम के साथ अदा की गई। इसके बाद सभी ताजिये अपने-अपने मुकाम के लिए रवाना हुए।
जायरीनों के लिए जगह-जगह लंगर और शरबत की व्यवस्था-
सुबह से देर रात तक शहर के विभिन्न मोहल्लों में मोहर्रम कमेटियों की ओर से जायरीनों के लिए लंगर, शरबत, भोजन और अल्पाहार की व्यवस्था की गई। चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, नीमच, मंदसौर, उदयपुर, छोटी सादड़ी, बड़ी सादड़ी, कपासन सहित आसपास के कई शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में जायरीन निम्बाहेड़ा पहुंचे और इमाम हुसैन की याद में आयोजित इस आयोजन में शामिल हुए।
बैंड की प्रस्तुति और ढोल की थाप ने बांधा समां-
मेवाफरोश मोहर्रम कमेटी के ताजिये के साथ रात्रि 11 बजे जय हिंद बैंड, निम्बाहेड़ा ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किए। वहीं मंदसौर ढोल पार्टी की दमदार ढोल की थाप ने जुलूस में जोश और उत्साह भर दिया। दोनों प्रस्तुतियों को जायरीनों और शहरवासियों ने खूब सराहा।
कौमी एकता और भाईचारे की दिखी मिसाल-
मोहर्रम के जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। इस दौरान हिंदू समाज के लोगों ने भी सम्मान और भाईचारे के साथ जुलूस में सहभागिता की। दोनों समुदायों की सहभागिता ने कौमी एकता, आपसी सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश की। जुलूस के दौरान लोगों ने मिलकर प्रेम, सद्भाव और इंसानियत का संदेश दिया।