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May 30, 2026, 1:53 pm
KHABAR : कागज पर दो बार बूढ़ा मानकर विभाग ने किया रिटायर, हाईकोर्ट ने मानी उम्र 59 वर्ष, अब साल 2029 तक नौकरी करेगा चौकीदार, पढे़ खबर 

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने वन विभाग के एक बेहद चौंकाने वाले और तानाशाही फैसले पर रोक लगाते हुए शुक्रवार को एक दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।


जिला मेडिकल बोर्ड की वैज्ञानिक रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंककर कर्मचारी को अधिकारियों ने मनमाने ढंग से जबरन रिटायर करने के विभाग के दो अलग-अलग आदेश दिए थे। मतलब कागजों में दो बार रिटायर्ड किया है। इन आदेशों को हाईकोर्ट ने पूरी तरह निरस्त कर दिया है।


हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मचारी को अप्रैल 2029 में उसकी कानूनी सेवाकाल की आयु (62 वर्ष) पूरी होने तक सम्मान सहित नौकरी पर बनाए रखा जाए। कोर्ट ने साल 2017 में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट जिसमें उस समय उसकी उम्र 50 वर्ष मानकर ही फैसला लिया है।


ऐसे समझें पूरा मामला
साहब सिंह ठाकुर को 12 अगस्त 1986 को दतिया वन परिक्षेत्र में दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के पद पर नियुक्त किया था।

साहब सिंह ने करीब 31 साल नौकरी में लगा दिए। 25 अप्रैल 2017 को विभाग ने उनकी सेवाओं को नियमित (स्थायी) कर दिया।

साहब सिंह की भर्ती के समय वन विभाग के पास उनकी आयु का कोई आधिकारिक या पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

तत्कालीन संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) ने नियमानुसार उनका एज डिटरमिनेशन टेस्ट (आयु परीक्षण) कराने के लिए उन्हें जिला मेडिकल बोर्ड भेजा।

7 अप्रैल 2017 को डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल (मेडिकल बोर्ड) ने पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद साहब सिंह की वास्तविक उम्र 50 वर्ष निर्धारित की थी।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक साहब सिंह ठाकुर को साल 2029 में रिटायर होना था।

विभाग ने साहब सिंह की उम्र सीधे 60 वर्ष मान ली और 2017 में ही उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का आदेश थमा दिया।

पीड़ित कर्मचारी जब हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इस आदेश पर तुरंत श्स्टे (स्थगन) दे दिया।

साल 2018 में दूसरी बार रिटायरमेंट कर दिया
हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से बौखलाए विभाग ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए 17 अप्रैल 2018 को एक और नया आदेश जारी कर दिया। अफसरों ने गलती छुपाने के लिए साहब सिंह की उम्र 62 वर्ष घोषित कर उन्हें फिर से नौकरी से बाहर धकेलने का प्रयास किया। दस्तावेजों पर एक ही कर्मचारी को दो बार जबरन बूढ़ा बना दिया गया।

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