नीमच। शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 के ऐतिहासिक खेल मैदान को बचाने की लड़ाई अब जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। रविवार को भारत माता चौराहे पर खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों, अभिभावकों, समाजसेवियों एवं बड़ी संख्या में शहरवासियों ने एकजुट होकर मैदान बचाने के समर्थन में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे प्रस्तावित सीएम राइज सांदीपनि विद्यालय के विरोधी नहीं हैं, बल्कि विद्यालय का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त शासकीय भूमि पर किया जाना चाहिए, ताकि शहर की खेल धरोहर और खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
मैदान नहीं मिटने देंगे... जैसे नारों से गूंजा भारत माता चौराहा-
धरना स्थल पर स्कूल भी चाहिए, मैदान भी चाहिए, मैदान बचाओ, भविष्य बचाओ, खिलाड़ियों का हक नहीं छीनने देंगे और मैदान नहीं मिटने देंगे जैसे नारों से पूरा भारत माता चौराहा गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास का अर्थ खेल मैदानों को समाप्त करना नहीं, बल्कि शिक्षा और खेल दोनों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना है।
सात दिनों के भीतर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग-
धरने को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कपिल सिंह चौहान ने कहा कि शहर में कई शासकीय भूमि एवं अतिक्रमणग्रस्त सरकारी भूखंड उपलब्ध हैं, जिन्हें मुक्त कर वहां विद्यालय का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन आसान रास्ता अपनाकर खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी अमूल्य धरोहर को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से सात दिनों के भीतर खेल मैदान एवं प्रस्तावित विद्यालय को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।
इसी मैदान ने दिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडी-
करणी सेना जिला अध्यक्ष गिरिराज सिंह रूपपुरा ने कहा कि इसी मैदान ने नीमच को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक खिलाड़ी दिए हैं। यदि यह मैदान समाप्त हो गया तो आने वाली पीढ़ियों से उनका सबसे महत्वपूर्ण खेल संसाधन छिन जाएगा। वहीं संडे क्रिकेट क्लब के प्रतिनिधि सुनील जैन ने कहा कि यह मैदान केवल खेल गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन भी है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे और युवा खेल अभ्यास करते हैं।
कलेक्टर के नाम सौंपा विस्तृत ज्ञापन-
धरना-प्रदर्शन के पश्चात खेल मैदान बचाओ संघर्ष समिति ने कलेक्टर के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 का खेल मैदान वर्षों से क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल, कबड्डी, खो-खो एवं एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन, सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों तथा विभिन्न सार्वजनिक गतिविधियों के लिए भी यह मैदान शहर का महत्वपूर्ण स्थल है। शहर के मध्य स्थित यह एकमात्र बड़ा सार्वजनिक खेल मैदान होने के कारण इसकी उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है।
खेल मैदान का किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं करें-
समिति ने मांग की है कि खेल मैदान का किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाए, इसे स्थायी खेल मैदान घोषित किया जाए तथा प्रस्तावित सीएम राइज सांदीपनि विद्यालय को किसी अन्य उपयुक्त शासकीय भूमि पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही मैदान पर खिलाड़ियों के लिए आधुनिक खेल सुविधाओं का विकास एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
सात दिन में निर्णय नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन-
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिनों के भीतर सकारात्मक एवं संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक मैदान को बचाने का नहीं, बल्कि शहर के हजारों खिलाड़ियों के भविष्य, खेल संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा का है। मैदान बचाने के लिए जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है और अब यह लड़ाई जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।