पिपलिया मंडी। किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता से भी जुड़ा हुआ है।
जारी बयान में जोकचंद ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था निष्पक्ष चुनाव, स्वतंत्र संस्थाओं और समान अवसर के सिद्धांतों पर आधारित है। ऐसे में किसी प्रमुख विपक्षी उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को समान अवसर मिलना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सभी पक्षों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर प्राप्त हो।
जोकचंद ने मीनाक्षी नटराजन को अनुभवी और जनहितैषी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में महिला सशक्तिकरण, किसानों के हित, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में उनका नामांकन निरस्त होना व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार समान अवसर, निष्पक्षता और संस्थाओं की स्वतंत्रता है। लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों की विविधता और जनभागीदारी का मंच भी है।
किसान नेता ने मांग की कि नामांकन निरस्तीकरण से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यपरक समीक्षा की जाए तथा सभी संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाली किसी भी प्रवृत्ति का संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए।