भोपाल। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया। भाजपा की ओर से उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए शपथ पत्र में एक लंबित न्यायिक प्रकरण की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था।
भाजपा की ओर से अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रत्याशी को अपने विरुद्ध लंबित मामलों की जानकारी शपथ पत्र में देना अनिवार्य है। भाजपा ने इसे तथ्यों को छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन रद्द करने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है, बल्कि केवल न्यायालय का नोटिस प्राप्त हुआ है। इसलिए नामांकन निरस्त करने का कोई आधार नहीं बनता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था। बाद में नामांकन पत्र निरस्त किए जाने का आदेश जारी किया गया।
विधानसभा परिसर में दिनभर चला सियासी घमासान-
मामले की सुनवाई के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही। कांग्रेस और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और पार्टी के विधिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेता भी उपस्थित रहे।
इस दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में प्रवेश को लेकर कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा कर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ समय तक विधानसभा परिसर में हंगामे का माहौल रहा। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।