रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में अभिनव पहल करते हुए रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में स्थापित 30 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का पुनर्स्थापन कर उसे सोलर कारपोर्ट के रूप में विकसित किया है। परियोजना का लोकार्पण मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।
यह सौर संयंत्र पहले विद्यालय भवन की छत पर स्थापित था। विद्यालय के नवीनीकरण एवं पुनर्विकास कार्य के चलते इसे हटाना पड़ा। इसके बाद रतलाम मंडल के विद्युत विभाग ने संयंत्र को नए स्वरूप में विकसित करते हुए सोलर कारपोर्ट के रूप में पुनः स्थापित किया।
सोलर कारपोर्ट ऐसी व्यवस्था है, जिसमें वाहन पार्किंग के ऊपर सौर पैनल लगाए जाते हैं। इससे एक ओर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होता है, वहीं दूसरी ओर वाहनों को छाया भी मिलती है। इस नवाचार से उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग होने के साथ पहले से स्थापित सौर संयंत्र का पुनः उपयोग भी संभव हो सका है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यह रतलाम मंडल की अपनी तरह की पहली पायलट परियोजना है। इसकी सफलता के बाद भविष्य में उन रेलवे परिसरों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकेगा, जहां भवनों के पुनर्विकास या सीमित छत उपलब्ध होने के कारण पारंपरिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करना संभव नहीं है।
लोकार्पण अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन और पार्किंग सुविधा का यह समन्वय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर लेफ्टिनेंट डी.के. प्रजापति सहित परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई दी।
अधिकारियों ने इसे भारतीय रेल में नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। 30 किलोवाट क्षमता का यह सोलर कारपोर्ट पश्चिम रेलवे की हरित ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा सतत रेलवे अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। साथ ही यह परियोजना भविष्य में अन्य रेलवे मंडलों एवं सरकारी संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है।