उज्जैन। रामघाट पर होने वाली पारंपरिक मां शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच चल रहा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को देशभर के प्रमुख तीर्थों से उज्जैन पहुंचे तीर्थ पुरोहितों ने मां शिप्रा का पूजन-अभिषेक कर विरोध की शुरुआत की। इसके बाद धर्मसभा और अखिल भारतीय तीर्थ महासभा की बैठक में आरती की व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि रामघाट पर वर्षों से चली आ रही पारंपरिक शिप्रा आरती में शासन-प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप किया जा रहा है। करीब एक माह पहले महाकाल मंदिर समिति की ओर से आए बटुकों द्वारा शिप्रा नदी पर आरती कराए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। पुरोहितों और पुजारियों ने इसका विरोध किया था। अगले दिन पुलिस और पुरोहितों के बीच विवाद की स्थिति भी बनी थी।
बुधवार सुबह करीब 9रू30 बजे अयोध्या, नासिक, प्रयागराज, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर, बैजनाथ धाम और देश के अन्य प्रमुख तीर्थों से पहुंचे पुरोहितों ने मां शिप्रा का पूजन किया। इस दौरान पुरोहितों ने प्रशासन से शिप्रा की पारंपरिक आरती व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करने की मांग की।
जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय तीर्थ महासभा के अध्यक्ष पंडित रामकृष्ण तिवारी ने कहा कि यदि तीर्थ पुरोहितों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को परंपरा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं करने की चेतावनी दी।
श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने बताया कि शिप्रा आरती के मुद्दे को लेकर शगुन गार्डन में धर्मसभा आयोजित की जाएगी। इससे पहले महासभा की कार्यकारिणी की बैठक में आरती व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न तीर्थों से पुरोहित इस धर्मसभा में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।
आरती के व्यवसायीकरण का आरोप
पंडित अमर डिब्बेवाला ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा सदियों पुरानी परंपरा में हस्तक्षेप किया जा रहा है। उनका कहना है कि महाकाल मंदिर में विद्या अध्ययन कर रहे बटुकों से आरती कराई जा रही है और टेंडर के माध्यम से आरती कराने से धार्मिक आयोजन के व्यवसायीकरण का खतरा है।
तीर्थ पुरोहितों ने शिप्रा आरती को कथित तौर पर ‘इवेंट’ का रूप देकर ठेके पर कराने का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उज्जैन की प्राचीन तीर्थ परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा
शिप्रा आरती का विवाद अब न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। श्री क्षेत्र पंडा समिति, उज्जैन ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर कर पारंपरिक आरती में शासन-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिका में श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति पर पारंपरिक शिप्रा आरती में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। समिति ने आरती शांतिपूर्वक आयोजित करने की अनुमति देने और उसे बंद नहीं करने के निर्देश जारी करने की मांग की है।
फिलहाल शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच विवाद जारी है। देशभर से पुरोहितों के उज्जैन पहुंचने और जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी के बाद यह मुद्दा और बड़ा रूप लेता दिखाई दे रहा है।