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September 9, 2026, 5:31 pm
BIG NEWS : अफीम की खेती में वैज्ञानिक तकनीक का तड़का, नारकोटिक्स विभाग ने किसानों को सिखाए उत्पादन और मार्फिन गुणवत्ता के गुर, नीमच के टाउन हॉल में संपन्न हुआ प्रशिक्षण शिविर, पढ़े खबर 

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नीमच। अफीम की खेती में बेहतर उत्पादन और निर्धारित मानकों के अनुरूप मार्फिन प्रतिशत हासिल करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी चुनौती को कम करने और किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, नीमच द्वारा बुधवार को टाउन हॉल में अफीम फसल की उन्नत खेती एवं गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में नीमच, जावद और मनासा विकासखंड के चयनित अफीम किसानों ने भाग लिया।

मिट्टी से लेकर सिंचाई तक वैज्ञानिक मार्गदर्शन-
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को भूमि चयन एवं प्रबंधन, उन्नत बीज, संतुलित पोषण, उर्वरक उपयोग, सिंचाई एवं जल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा रोग-कीट प्रबंधन से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि समय पर और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग तथा फसल की आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जा सकता है।

उत्पादन के साथ मार्फिन प्रतिशत पर भी फोकस-
शिविर में फसल की गाढ़ता और मार्फिन प्रतिशत को निर्धारित स्तर तक बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सीपी पचौरी ने बताया कि कई बार किसानों को अपेक्षित उत्पादन तो मिल जाता है, लेकिन फसल की गुणवत्ता या मार्फिन प्रतिशत निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच पाता। इसके पीछे पोषक प्रबंधन, जल प्रबंधन तथा कृषि रसायनों के अनुचित उपयोग जैसे कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह से करें दवाओं का उपयोग- 
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि फसल में किसी भी दवा या रसायन का उपयोग विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाए। साथ ही पोषक तत्वों का उपयोग समय पर करने तथा सिंचाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।

परंपरागत ज्ञान के साथ विज्ञान जरूरी- निखिल गांधी
डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर निखिल गांधी ने कहा कि यदि किसान अपने परंपरागत ज्ञान के साथ वैज्ञानिक शोध एवं तकनीकों को जोड़कर खेती करें तो उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और अफीम से बनने वाली जीवनरक्षक दवाओं के लिए आवश्यक कच्चा माल भी उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादन हासिल करने के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

जल प्रबंधन और रसायनों के उपयोग की दी जानकारी-
प्रशिक्षण में किसानों को विशेष रूप से जल प्रबंधन और फसल में रसायनों के उपयोग को लेकर जागरूक किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि फसल के विभिन्न चरणों में पानी की जरूरत अलग-अलग होती है। इसी प्रकार बिना विशेषज्ञ सलाह के कृषि रसायनों का प्रयोग फसल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। किसानों को फसल की देखभाल और संग्रहण से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई।

किसानों ने पूछे सवाल, उत्कृष्ट किसानों का सम्मान-
शिविर में किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और जिज्ञासाओं को लेकर वैज्ञानिकों से सवाल पूछे। किसानों ने ऐसे प्रशिक्षण शिविर नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता बताई, ताकि किसान, वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे।

किसानों को दिलाई नशामुक्ति की शपथ- 
कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष बेहतर उपज प्राप्त करने वाले किसानों को डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही उपस्थित किसानों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। इस अवसर पर डीओ लालाराम दिनकर, रविंद्र डोगरे, जेपी मीणा, कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. श्याम सिंह, कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर मंदसौर की डॉ. किरण सहित विभागीय अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

आगे भी जारी रहेंगे प्रशिक्षण शिविर- 
अधिकारियों ने बताया कि किसानों से शिविर की उपयोगिता को लेकर फीडबैक लिया गया है। किसानों को यदि ऐसे प्रशिक्षण से लाभ मिलता है और इसकी आवश्यकता महसूस होती है तो इस तरह के शिविर आगे भी लगातार आयोजित किए जाएंगे। इससे पहले मंदसौर जिले के किसानों के लिए भी इसी प्रकार का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा चुका है।

 

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