मंदसौर। जिले में मानसून थमने के बाद एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ने लगा है। 19 सितंबर के बाद से जिले में बारिश नहीं हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून अब विदाई की ओर है और आगामी दिनों में बारिश की संभावना कम है।
भू-संसाधन प्रबंधन कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 1 अक्टूबर तक जिले में 750.8 मिलीमीटर (29.56 इंच) बारिश दर्ज की गई। यह पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 867 मिलीमीटर (34.13 इंच) बारिश से 116.2 मिलीमीटर यानी करीब 13.4 फीसदी कम है। जिले की औसत वार्षिक बारिश 826.5 मिलीमीटर है। इस लिहाज से इस बार बारिश का आंकड़ा औसत से 75.7 मिलीमीटर कम रहा। 2 अक्टूबर को जिले में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई।
मल्हारगढ़ में सबसे ज्यादा, संजीत में सबसे कम बारिश-
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश के आंकड़ों में काफी अंतर रहा। मल्हारगढ़ में सबसे अधिक 919 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि संजीत में सबसे कम 516 मिलीमीटर बारिश हुई। भानपुरा में पिछले वर्ष की तुलना में आधी से भी कम बारिश दर्ज की गई। वहीं गरोठ और मल्हारगढ़ में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बारिश हुई।
मौसम बदलने से बढ़े मौसमी बीमारी के मरीज-
बारिश के बाद मौसम में बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल में इन दिनों सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल फीवर, गले में संक्रमण, दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आकाश चौधरी ने बताया कि मौसम में बदलाव के साथ संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल फीवर और गले के संक्रमण के मरीज सामने आ रहे हैं। दस्त और पेट दर्द की शिकायत वाले मरीज भी उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉ. चौधरी ने लोगों को साफ एवं सुरक्षित पानी पीने, ताजा भोजन करने, मच्छरों से बचाव रखने और मौसम के अनुसार कपड़े पहनने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि बुखार दो-तीन दिन तक बना रहता है तो चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।