मुंबई। पंडित मुस्तफ़ा आरिफ द्वारा रचित गीता भारती (भगवद गीता: हिंदी मुक्तक में) पर कैफे बॉलीवुड द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोग पूछते है कि आपको प्रेरणा कहां से मिली। वो कहते है कि मेरा मिशन धर्म ग्रंथो में सामंजस्य स्थापित करना है। जब बात कर्म की होती है, तो भगवद गीता की चर्चा के बिना मिशन संपूर्ण नहीं होता।
पंडित मुस्तफा ने कहा की कुरान पर 10000 छंद की रचना के बाद जब मुझे लगा की कुरान से 5000 पूर्व भगवद गीता की रचना भगवान श्रीकृष्ण के महाभारत में अर्जुन को दिए गए उपदेश से हुए। जिसे आत्मसात कर अर्जुन एक सफल वीर योद्धा बने।
वे कुरान शरीफ के दूसरे अध्याय के चौथे पद को उद्धृत करते हुए कहते है जिसमें अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद साहब को ये संदेश दिया की तुम पर जो किताब यानि कुरान उतारा गया है, और उससे पहले धरती पर किताब उतारी गई उन सब पर तुम ईमान लाओगे यानि मानेंगे। तो फिर गीता जो कुरान से पांच हजार पूर्व आए उसे हमें क्यूं नहीं मानना चाहिए?
कुरान के अनुसार धरती पर सवा लाख पैगंबर यानि ईश्वर के दूत आए, जो संपूर्ण धरती के चप्पे चप्पे पर आए और उनके साथ किताबे आए या उन्होने प्राणी मात्र के कल्याण के लिए सृजन किया। तो हमें ये मानना होगा कि वेद, पुराण, उपनिषद आदि भी इन्हीं महापुरुष या संदेश दूतो का सृजन है, इनको अलग करके नहीं देखा जा सकता।
वे कहते है कि जहां ईश्वर या परमात्मा या अल्लाह वहां धर्म का सामंजस्य है, वहां एकता है। ईश्वर कहो या अल्लाह ये मनुष्य की भाषा है, परमात्मा की कोई भाषा नहीं, न संस्कृत न अरबी। ग्रंथ उसी भाषा मे दिए गए जो क्षेत्र विशेष के लोगो को आती थी, ताकि ग़ैबी ज़ुबान (गुप्त भाष) सारी दुनिया को सिखानी न पड़े।
पंडित मुस्तफा ने कुरान और गीता के साम्य को स्थापित करते हुए, उनके द्वारा रचित गीता भारती के कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञान योग पर आधारित चयनित मुक्तको को प्रस्तुत करते हुए व्याख्या की। बताया कि प्रत्येक मुक्तक बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में है, जो आसानी से गाये और समझे जा सकते है।
गीता मर्मज्ञ दास नारायण ने कहा कि वे ईश्वर को धन्यवाद देते है कि ऐसा व्यक्ति इस धरती पर इस पुनीत काम के लिए जन्मा, और चाहते है कि ऐसे और लोग जन्म ले, जिससे हर जाति हर धर्म का कल्याण हो। वे कहते है कि प्रेम ही धर्म है, दो अलग अलग शाखाएं नहीं। वृक्ष का तना प्रेम है, शाखाएं बाद में अलग-अलग रूप लेती है, चाहे जाति कहो या संप्रदाय दोनो ग्रंथ प्रेम की ही व्याख्या करते है, प्रेम ही सिखाते है।
संगीत निर्देशक विवेक प्रकाश भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा के साथ गीता भारती की रेकॉर्डिंग योजना पर कार्य कर रहैं है। उन्होंने बताया कि परमात्मा कृपा से वे भगवद गीता आधारित पांच कृतियो को रेकॉर्ड कर चुके है, जिनमें पद्मश्री अनवर जलालपुरी का ऊर्दू अनुवाद सम्मिलित है। उन्होने गीता भारती के कुछ मुक्तक गाकर पेश किए। आश्वस्त किया कि भाषा के जटिल पाठ को सरल बनाने का प्रयास करेंगे जो लोगो के लिए आसान हो, स्वीकार्य हो।
मुंबई के फंकार हॉल में आयोजित बॉलीवुड के संचालक और कार्य क्रम के सूत्रधार इरफ़ान शामी ने गीता भारती के औचित्य की चर्चा करते हुए संपूर्ण रूप रेखा रखी। वरिष्ठ पत्रकार सुभाष त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम में गीता विद्वान दास नारायण की कृति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। समापन विराट कवि सम्मेलन और मुशायरे के साथ हुआ।