पोलायकलां। शाजापुर जिले के मोरटाकेवड़ी गांव में सोमवार को एक हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या होगा कि जिस बेटे को बचाने के लिए परिवार उपचार के लिए अस्पताल ले जा रहा था, उसी बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां की भी तबीयत बिगड़ गई। बेटे की मौत का सदमा मां सहन नहीं कर सकी और कुछ ही देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया। मां-बेटे की एक साथ अर्थी उठी तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार मोरटाकेवड़ी निवासी देवकरण दांगी (35) कुछ समय पहले सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनके पैर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद पैर में रॉड डाली गई थी। उपचार के बाद भी पैर में अंदरूनी समस्या बढ़ती जा रही थी। परिजन उनकी हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए शुजालपुर लेकर जा रहे थे।लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। परिजन देवकरण को उपचार के लिए शुजालपुर ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। देवकरण की मौत की खबर जैसे ही परिवार और गांव में पहुंची, घर में कोहराम मच गया।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां हुई बेहोश
देवकरण की 65 वर्षीय मां नोरंग बाई को जैसे ही बेटे की मौत की जानकारी मिली, वे सदमे में बेहोश हो गईं। परिजनों ने उन्हें संभाला और तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोलायकलां ले जाने की तैयारी की। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद नोरंग बाई को अचानक अटैक जैसी स्थिति हुई और वे बेसुध हो गईं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं। एक ओर परिवार देवकरण की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मां की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
कुछ ही घंटों में बदल गया पूरा परिवार
सुबह तक जिस घर में बेटे के इलाज और उसके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद थी, उसी घर में कुछ ही समय बाद दो अर्थियां तैयार करनी पड़ीं। एक तरफ 35 वर्षीय देवकरण की अर्थी थी तो दूसरी तरफ उनकी 65 वर्षीय मां नोरंग बाई की। मां-बेटे की एक साथ अंतिम यात्रा निकली तो ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। गांव में जिसने भी यह दृश्य देखा, वह भावुक हो उठा। मां और बेटे का एक साथ अंतिम संस्कार किए जाने से पूरे मोरटाकेवड़ी में मातम का माहौल रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए और नम आंखों से मां-बेटे को अंतिम विदाई दी।
परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं
देवकरण की मौत से परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चिंता रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य की खड़ी हो गई है। देवकरण अपने पीछे 12 वर्षीय बेटे शुभम और 16 वर्षीय बेटी ज्योति को छोड़ गए हैं। परिवार में अब कोई ऐसा सदस्य नहीं बचा जो नियमित रूप से कमाकर घर चला सके। महज 12 वर्ष की उम्र में शुभम के सामने पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं 16 वर्षीय ज्योति भी पिता के साए से वंचित हो गई। मां नोरंग बाई के निधन ने इस दुख को और गहरा कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परिवार में इतनी कम उम्र में दो मौतों ने सभी को झकझोर दिया है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया परिवार पर एक साथ आई इस विपदा से गांव का माहौल गमगीन है।
प्रशासन से परिवार की मदद की अपील
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं है। ऐसे में 12 वर्षीय शुभम और 16 वर्षीय ज्योति की पढ़ाई तथा भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा और परिवार की आर्थिक सहायता के लिए शासन की योजनाओं के माध्यम से मदद दिलाने की मांग की है।मां-बेटे की एक साथ उठी अर्थी ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।