कवियत्री अंकिता शुक्ला कानपुर
देश की खातिर लहू अपना बहाया आपने!
एक सौ सत्तर चरागों को है बचाया आपने!!
दुश्मनों के सारे मंसूबों पे पानी फिर गया!
जो दिलेरी का है वो जौहर दिखाया आपने!!
अपनी जां को डालकर खतरे में अपने फ़र्ज़ को!
हमने भी देखा है के कैसे निभाया आपने!!
जाने कितने घर के थे सिंदूर मां बेटी बहन!
जाने कितने घर उजड़ने से बचाया आपने!!
चीर कर कुत्ते को मेरे शेर दिल स्मित ने फिर!
शान अपने देश की ऐसे बढ़ाया आपने!!
आपकी क़ुर्बानियों पर नाज़ क्यों हमको न हो!
काम ही ऐसा हमें कर के दिखाया आपने!!
अंकिता में शुक्रिया कैसे अदा कर पाऊंगी!
मुझको इस महफिल का जो हिस्सा बनाया आपने!!