नीमच। बिजली सप्लाई बंद होने के परमिट के भरोसे पोल पर चढ़कर काम कर रहे कर्मचारी को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल मौत उसका इंतजार कर रही है। बिसलवास कलां के समीप मंगलवार दोपहर करीब 2.30 बजे अचानक बिजली सप्लाई चालू हुई और पोल पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारी प्रताप सिंह (35) को करंट लग गया। करंट का झटका लगते ही वह पोल से नीचे जा गिरा और उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। शव लेकर बिजली कार्यालय पहुंचे परिजनों ने चक्काजाम कर दिया और 50 लाख रुपए मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा परमिट देने वाले जिम्मेदार के खिलाफ एफआईआर की मांग पर अड़ गए। खबर लिखे जाने तक चक्काजाम और प्रदर्शन जारी था।
मुख्य सड़क पर शव रख किया चक्काजाम-
घटना के बाद मृतक के परिजनों में आक्रोश फैल गया। परिजन शव लेकर टीआईटी कॉलोनी के सामने गोमाबाई रोड स्थित बिजली कार्यालय पहुंचे और शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चक्काजाम कर दिया। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। खबर लिखे जाने तक परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए थे और चक्काजाम व प्रदर्शन जारी था।
करीब 10 वर्षों से बिजली विभाग में कर रहा था काम-
मृतक प्रताप सिंह पिछले करीब 10 वर्षों से बिजली विभाग में कच्चे तौर पर कार्य कर रहा था। मंगलवार को भी वह बिसलवास कलां क्षेत्र में बिजली पोल पर काम करने पहुंचा था। परिजनों के अनुसार क्षेत्र में विद्युत सप्लाई बंद रखने का परमिट सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक का था। इसी दौरान कर्मचारी बिजली पोल पर आवश्यक कार्य कर रहा था। दोपहर करीब 2.30 बजे अचानक बिजली सप्लाई चालू हो गई। जैसे ही पोल में करंट दौड़ा, प्रताप सिंह को जोरदार करंट लगा और वह पोल से नीचे जा गिरा। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर स्थिति में उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई।
शव लेकर बिजली कार्यालय पहुंचे परिजन-
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन बिजली कार्यालय पहुंचे। परिजन शव को लेकर टीआईटी कॉलोनी के सामने गोमाबाई रोड स्थित बिजली कार्यालय पहुंचे और यहां शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि जब बिजली सप्लाई बंद रखने का परमिट लिया गया था तो उसके बावजूद सप्लाई कैसे चालू हुई, इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
हादसे के बाद भी विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा-
परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद भी विभाग के बड़े जिम्मेदार अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर उनसे चर्चा करने के लिए सामने नहीं आए। इसी बात को लेकर परिजनों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने शव रखकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
लिखित में मांगा 50 लाख मुआवजा और परिवार के सदस्य को नौकरी
मृतक के परिजनों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से प्रशासन और बिजली विभाग के सामने रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि बिजली सप्लाई बंद रखने का परमिट देने वाले जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए तथा मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। परिजनों ने बताया कि प्रताप सिंह लंबे समय से बिजली विभाग में कार्यरत था और परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने मांगों को लिखित में लेने और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की मांग की।
करणी सेना ने किया मांगों का समर्थन, पुलिस मौके पर-
करणी सेना के प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह शक्तावत ने परिजनों की मांगों का समर्थन करते हुए हादसे की जांच और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। चक्काजाम की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजन 50 लाख रुपए मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और परमिट देने वाले जिम्मेदार के खिलाफ एफआईआर की मांग पर अड़े रहे। खबर लिखे जाने तक शव रखकर चक्काजाम और प्रदर्शन जारी था।
कार्यपालन यंत्री ने दिया जांच का आश्वासन-
नीमच संभाग के कार्यपालन यंत्री महिप सोनी ने बताया कि सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि परमिट के दौरान बिजली सप्लाई कैसे चालू हुई, इसकी जांच की जाएगी। जांच के आधार पर उचित कार्रवाई और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। हादसे के बाद मुख्य सवाल यही है कि बिजली बंद रखने के परमिट के बावजूद सप्लाई कैसे चालू हुई। विभागीय जांच के बाद ही तकनीकी कारण या लापरवाही की स्थिति स्पष्ट होगी।