नीमच। बिजली बंद रखने के परमिट के बावजूद लाइन में करंट दौड़ने से एक आउटसोर्स लाइनमैन की जान चली गई। हादसे के बाद नीमच में बिजली कंपनी के खिलाफ आक्रोश भड़क उठा। परिजनों और समाजजनों ने शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। करीब 12 घंटे तक चले धरने और प्रदर्शन के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मामला उस समय और गरमा गया, जब करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होकर बिजली कंपनी के अधिकारियों से जवाब मांगा। देर रात करीब 17 लाख रुपए मुआवजा, परिवार को पेंशन और एक सदस्य को नौकरी देने के आश्वासन के बाद परिजन शव उठाने को राजी हुए।
मृतक प्रतापसिंह राजपूत (36) पिता भंवरसिंह राजपूत, निवासी अमरावली महल, मंगलवार को बिसलवासकलां स्थित बिजली ग्रिड पर काम करने गए थे। परिजनों का आरोप है कि बिजली कंपनी के एरिया सुपरवाइजर दिलीप अग्रवाल के पास दोपहर 3 बजे तक बिजली बंद रखने का परमिट था। आरोप है कि करीब 2.30 बजे ही लाइन चालू कर दी गई। इसी दौरान पोल पर काम कर रहे प्रतापसिंह करंट की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।
हादसे के बाद साथी कर्मचारी प्रतापसिंह को शाम करीब 4.06 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद आक्रोशित परिजन और समाजजन शव लेकर सीआरपी-गोमाबाई रोड स्थित बिजली कंपनी कार्यालय पहुंच गए। यहां शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। देखते ही देखते मार्ग पर चक्का जाम हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बिजली कंपनी में बिल जमा कराने पहुंचे लोग भी कार्यालय परिसर में फंस गए।
अधिकारियों की समझाइश, लेकिन मांगों पर अड़े रहे परिजन-
सूचना मिलते ही एई महीप सोनी, तहसीलदार और बघाना थाना प्रभारी पुष्पासिंह चौहान सहित अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने हादसे की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और मृतक परिवार को आर्थिक सहायता के साथ नौकरी देने की मांग रखी।
जीवन सिंह शेरपुर के पहुंचते ही आंदोलन ने पकड़ा जोर-
मामला शांत कराने के प्रयासों के बीच करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर करीब 1 बजे नीमच पहुंचे। वे सीधे धरना स्थल पर पहुंचे और मृतक के परिजनों एवं समाजजनों के साथ आंदोलन में शामिल हो गए।
शेरपुर ने बिजली कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताते हुए कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मृतक परिवार को सम्मानजनक मुआवजा और आश्रित को नौकरी देने की मांग भी उठाई। उनके पहुंचने के बाद प्रदर्शन और तेज हो गया। धरना स्थल पर बिजली कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। करणी सेना जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह बावल, प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह शक्तावत, बिट्टू बना सहित बड़ी संख्या में समाजजन और परिजन आंदोलन में मौजूद रहे।
4 लाख की सहायता की बात पर बढ़ा आक्रोश-
प्रदर्शनकारियों ने मृतक परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा अथवा पत्नी या छोटे बच्चे को नौकरी देने की मांग रखी। इस दौरान अधिकारियों की ओर से करीब 4 लाख रुपए की सहायता की बात सामने आने पर प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। जीवन सिंह शेरपुर सहित आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक शव नहीं उठाया जाएगा। इसके बाद अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
17 लाख मुआवजा, पेंशन और नौकरी के आश्वासन पर बनी सहमति
करीब 12 घंटे तक चले चक्का जाम और धरने के बाद बिजली कंपनी की ओर से मृतक परिवार को 17 लाख रुपए मुआवजा, पेंशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद परिजन और समाजजन आंदोलन समाप्त करने के लिए सहमत हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया।
परमिट के बावजूद लाइन कैसे हुई चालू?
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बिजली बंद रखने का परमिट दोपहर 3 बजे तक था, तो परिजनों के आरोप के मुताबिक 2.30 बजे ही लाइन में करंट कैसे दौड़ गया? बिजली आपूर्ति किस स्तर से बहाल हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।