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October 12, 2026, 12:07 pm
BIG NEWS : एनआरआई दूल्हे का फर्जी चेहरा दिखाकर महिला को लगाया 7.5 लाख का चूना, मंदसौर पुलिस की कार्रवाई में सामने आया भयानक सच, खातों और सिम कार्डों के बड़े नेटवर्क का खुलासा, पढ़े कमलेश प्रजापति की खबर

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मंदसौर। जिले के शामगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए एक युवती से करीब 7.5 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े नौवें आरोपी वासील सिद्दिकी को उत्तर प्रदेश के हरदोई से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी गिरोह को आगरा और फिरोजाबाद के म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इससे पहले बिहार के छह मुख्य आरोपियों सहित भोपाल के दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच में गिरोह के तार नेपाल और संभावित विदेशी संपर्कों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी टोनी कुमार और उसके साथी शिवम गुप्ता की मुलाकात नेपाल के वीरगंज और काठमांडू स्थित कैसीनो में हुई थी। बताया जा रहा है कि महंगे शौक और जुए के लिए रकम जुटाने के उद्देश्य से दोनों ने साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा किया। हालांकि, विदेशी संपर्कों और कथित पाकिस्तान कनेक्शन की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच जारी है।

11 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन, 125 वारदातों से जुड़े होने की आशंका-
प्रारंभिक जांच में पिछले करीब चार से छह महीनों के दौरान गिरोह से जुड़े बैंक खातों में 11 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। जांच से जुड़े कुछ इनपुट में गिरोह का संबंध देशभर में 125 तक साइबर वारदातों से होने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने 150 से अधिक म्यूल बैंक खातों और सिम कार्ड के इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं।

कार्रवाई के दौरान अब तक 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम और पांच एटीएम कार्ड जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस को करीब 150 बैंक खातों से जुड़े साक्ष्य भी मिले हैं। अलग-अलग खातों में जमा करीब 22 लाख रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं, जिनमें पीड़िता की रकम भी शामिल बताई गई है। करीब 11 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि फ्रीज कराने की प्रक्रिया जारी है। राशि फ्रीज होने के बाद न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से पीड़िता को रकम वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

एटीएस ने मुख्य आरोपी से की पूछताछ-
मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 सितंबर को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने शामगढ़ थाने पहुंचकर आरोपियों से पूछताछ की थी। एटीएस ने भी मुख्य आरोपी से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन, विदेशी संपर्कों, म्यूल खातों और डिजिटल वॉलेट से जुड़े पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई।

पुलिस को विदेशी मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और डिजिटल लेन-देन से संबंधित कुछ संदिग्ध इनपुट मिले हैं। जांच में पाकिस्तान में बैठे लोगों से निर्देश मिलने की आशंका भी सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर नेटवर्क की वास्तविक भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

जरूरतमंदों के नाम पर खुलवाते थे बैंक खाते-
पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग टीमों में बंटा हुआ था। एक टीम जरूरतमंद लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने के साथ पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर खातों से रकम निकालती थी। खाता फ्रीज होने पर आरोपी मोबाइल, सिम, एटीएम कार्ड और पासबुक नष्ट कर नए खातों के जरिए काम शुरू कर देते थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक खातों से रकम निकालने के बाद कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) के जरिए दूसरे खातों में पैसा जमा किया जाता था। इसके बाद रकम अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजी जाती थी। पुलिस अब खाताधारकों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और सीडीएम के जरिए रकम आगे भेजने वाले संदिग्धों की तलाश कर रही है।

नेपाल के कैसीनो में हुई थी दोस्ती-
जांच में बिहार के गोपालगंज जिले के छपिया निवासी टोनी कुमार को गिरोह का मुख्य सरगना बताया गया है। पुलिसिया जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार, टोनी बिहार के कनेर क्षेत्र में पंचायत सचिव भी है। टोनी और उसके साथी शिवम गुप्ता की मुलाकात करीब पांच साल पहले नेपाल के वीरगंज और काठमांडू स्थित कैसीनो में हुई थी।

बताया जा रहा है कि महंगे शौक और जुए के लिए रकम जुटाने के उद्देश्य से दोनों साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल हुए। जांच के अनुसार, टोनी पहले खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। बाद में वह इसी तरह के अपराध में शामिल हो गया और धीरे-धीरे गिरोह का मुख्य सरगना बन गया। गिरोह में भरोसेमंद लोगों को जोड़कर उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कुछ आरोपियों के नेपाल में रिश्तेदार होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।

पाकिस्तान कनेक्शन और क्रिप्टोकरेंसी से रकम भेजने के संदेह की जांच-
पुलिस को गिरोह के संभावित पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर मोबाइल चैट, कॉलिंग और लेन-देन से जुड़े संदिग्ध इनपुट मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में कराची से जुड़े अब्दुल, रज्जाक और अन्य नामों का उल्लेख मिला है। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को ठगी की रकम का करीब 10 प्रतिशत अपने पास रखने और शेष 90 प्रतिशत आगे भेजने के निर्देश दिए जाते थे या नहीं।

मुख्य आरोपी टोनी कुमार के जरिए ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर पाकिस्तान भेजे जाने का संदेह भी जताया गया है। पुलिस क्रिप्टो एक्सचेंज के रिकॉर्ड, केवाईसी विवरण, डिजिटल वॉलेट एड्रेस और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच कर रही है, ताकि रकम के वास्तविक स्रोत और उसके अंतिम गंतव्य का पता लगाया जा सके।

रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल के अनुसार, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन सहित मामले के अन्य पहलुओं की जांच जारी है। विदेशी कनेक्शन की पुष्टि होने पर केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा। पुलिस बिहार सरकार को मामले से जुड़ी जानकारी भेजने और आरोपियों की अवैध संपत्तियों को फ्रीज करने संबंधी प्रस्ताव पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

मैट्रिमोनियल साइट पर एनआरआई बनकर युवती को फंसाया-
मामले की शुरुआत शामगढ़ थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई, जिसने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। आरोपी ने खुद को एनआरआई बताकर उससे संपर्क किया। नकली फोटो और फर्जी परिजनों के जरिए युवती का विश्वास जीता गया। इसके बाद शादी का झांसा देकर विदेश से महंगा उपहार भेजने की बात कही गई।

कुछ समय बाद युवती को बताया गया कि उपहार कस्टम विभाग में पकड़ा गया है। कस्टम ड्यूटी, सेल्स टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा गया। इस तरह किश्तों में युवती से करीब 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। ठगी का पता चलने पर उसने शामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

एसपी विनोद कुमार मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की। पुलिस ने करीब डेढ़ महीने तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में करीब 15 दिनों तक दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

भोपाल के दो आरोपियों की गिरफ्तारी से खुलीं नई कड़ियां-
छह मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भोपाल के सरस्वती नगर निवासी शिवांश उर्फ शिवा यादव (29) को उत्तर प्रदेश के वृंदावन से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वह जरूरतमंद लोगों के नाम पर खोले गए म्यूल खाते, बैंक दस्तावेज, पासबुक और एटीएम कार्ड करीब 12 हजार रुपये में खरीदता था और उन्हें बिहार के गिरोह को लगभग 17 हजार रुपये में बेचता था।

शिवांश ने प्रारंभिक पूछताछ में 15 से 20 म्यूल खातों की जानकारी दी। उसने टोनी और शिवम से नेपाल में दोस्ती होने की बात भी बताई। पुलिस अब इन खातों के धारकों की तलाश कर रही है। जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने मामूली रकम के लालच में अपने बैंक दस्तावेज दूसरों को उपलब्ध कराए थे। ऐसे खाताधारकों की भूमिका की जांच की जा रही है।

इसके बाद पुलिस ने भोपाल के नेहरू नगर निवासी कृष्णासिंह दोहरे (20) को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने और अन्य लोगों के बैंक संबंधी दस्तावेज गिरोह को उपलब्ध कराए थे। उसके नाम के बैंक खाते में करीब दो लाख रुपये जमा हुए, जिन्हें कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए आगे भेजा गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके द्वारा चार से पांच खाते उपलब्ध कराने की बात सामने आई। पुलिस आगरा से जुड़े ट्रांजेक्शन की भी जांच कर रही है।

नौवां आरोपी वासील हरदोई से गिरफ्तार-
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में शामगढ़ पुलिस की टीमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में दबिश दे रही थीं। इसी क्रम में फिरोजाबाद जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र के हाजीपुरा निवासी वासील पिता अख्तर सिद्दिकी (23) को हरदोई से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, वासील गिरोह को आगरा और फिरोजाबाद के म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता था। उससे पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और खातों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक कुल नौ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

शामगढ़ थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच का मुख्य फोकस म्यूल खाते उपलब्ध कराने वालों, खाताधारकों, सीडीएम के जरिए रकम आगे भेजने वाले लोगों और संदिग्ध विदेशी संपर्कों पर है। पुलिस का कहना है कि नेपाल और पाकिस्तान से जुड़े संभावित संपर्कों की पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों के साथ जांच संबंधी जानकारी साझा की जाएगी।

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