उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के ग्रामीण इलाकों में नीलगाय और कृष्णमृग किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए है । खेतों में खड़ी फसलों को इन वन्यजीवों के झुंड नुकसान पहुंचा रहे हैं । किसानों की इस समस्या को देखते हुए वन विभाग ने अब इन्हें सुरक्षित पकड़ने के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया है ।
इसके लिए उज्जैन के ब्रजराजखेड़ी में दक्षिण अफ्रीका की मशहूर बोमा पद्धति अपनाई जा रही है। इस पद्धति के तहत वन्यजीवों को एक खास रास्ते यानी फनल के जरिए घेराबंदी वाले स्थान तक लाया जाता है, जहां उन्हें सुरक्षित पकड़ा जा सके। वन विभाग की टीम ने इसके लिए फनल और घेराबंदी तैयार की है। रेस्क्यू अभियान में हेलीकॉप्टर की भी मदद ली जा रही है।
डीएफओ अनुराग तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ब्रजराजखेड़ी, हासमपुरा, सेवरखेड़ी, आलमपुर और पंथपिपलाई सहित कई इलाकों का निरीक्षण कर चुकी है। अभियान के दौरान नीलगाय और कृष्णमृग के झुंडों को तय रास्ते से बोमा डोम तक लाने की योजना है।
ग्रामीण इलाकों में किसान लंबे समय से नीलगाय के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की शिकायत कर रहे हैं। कई बार रातों-रात खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है। ऐसे में वन विभाग का यह अभियान सफल रहता है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही वन्यजीवों को भी बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित दूसरी जगह ले जाने में मदद मिलेगी।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान कुछ दिनों तक खेतों में पानी न दें और नीलगाय या कृष्णमृग का झुंड दिखाई देने पर इसकी सूचना तुरंत वन विभाग की टीम को दें। रेस्क्यू के दौरान मौके पर ग्रामीणों की आवाजाही को भी नियंत्रित किया जा रहा है।