नीमच। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर महामाया भादवा माता मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी के जल को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है। लोक-मान्यता के अनुसार, इस बावड़ी के जल से स्नान करने और यहां कुछ समय ठहरकर माता की आराधना करने से लकवा और चर्म रोग जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
प्राचीन बावड़ी के जल को लेकर मान्यता-
मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी को श्रद्धालु आस्था का विशेष केंद्र मानते हैं। मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने और माता के दर्शन-पूजन से रोगों से राहत मिलती है। इसी विश्वास के चलते कई लोग यहां अपनी शारीरिक परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं।
स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर भी पहुंचते हैं श्रद्धालु-
मंदिर में लकवा सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोग भी परिजनों के सहारे, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु माता की कृपा और मंदिर में ठहरने को अपने लिए लाभकारी मानते हैं। कुछ लोगों की मान्यता है कि यहां कुछ दिन रुकने, बावड़ी में स्नान करने, संध्या आरती में शामिल होने और मंदिर परिसर में विश्राम करने से उन्हें राहत मिलती है।
‘मालवा की वैष्णोदेवी’ के नाम से भी प्रसिद्ध-
महामाया भादवा माता के इस धार्मिक स्थल को श्रद्धालु ‘मालवा की वैष्णोदेवी’ और आरोग्य तीर्थ के नाम से भी संबोधित करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन, पूजा-अर्चना और आरती के लिए भक्तों का पहुंचना जारी है। श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक गतिविधियों के चलते परिसर में विशेष रौनक बनी हुई है।
महत्वपूर्णरू बावड़ी के जल से लकवा या अन्य बीमारियां ठीक होने के दावों की चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। लकवा और अन्य गंभीर बीमारियों में समय पर चिकित्सकीय उपचार लेना आवश्यक है। धार्मिक आस्था के साथ डॉक्टर की सलाह और निर्धारित इलाज जारी रखना चाहिए।