नीमच। मध्यप्रदेश शासन ने अगस्त 2024 में 2015 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हिमांशु चंद्रा को नीमच जिले का कलेक्टर नियुक्त किया था। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक दक्षता, नवाचार, पारदर्शिता और जनकल्याण से जुड़े कई प्रयास सामने आए हैं। राजस्व प्रकरणों के निराकरण से लेकर जल संरक्षण, शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और जरूरतमंदों की सहायता तक, उनके नेतृत्व में जिले में विभिन्न स्तरों पर कार्य किए गए हैं।
राजस्व प्रशासन में प्रदेश में प्रथम स्थान-
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में नीमच जिले ने आरसीएमएस पोर्टल पर राजस्व प्रकरणों के निराकरण में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामलों के अधिकतम निराकरण के साथ नक्शा तरमीम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इन प्रयासों के तहत 95 प्रतिशत तक प्रकरणों के निराकरण का लक्ष्य रखा गया। राजस्व महा-अभियान और फार्मर रजिस्ट्री में रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) लिंकिंग के कार्य को भी शत-प्रतिशत संतृप्ति की दिशा में आगे बढ़ाया गया।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत मनासा तहसील के ग्राम बालागंज में संभाग की पहली प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पूर्ण कराई गई। जिले में इस योजना के तहत 1,03,827 प्लॉट और 1,25,607 हितग्राही पंजीकृत हैं।
जल संरक्षण और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल-
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिला प्रशासन ने अनुपयोगी बोरवेल को रिचार्ज पिट में परिवर्तित करने का अभिनव मॉडल अपनाया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जावद क्षेत्र की सरोदा ग्राम पंचायत में इसकी पहली संरचना तैयार की। इस मॉडल की लागत लगभग 20 से 30 हजार रुपये बताई गई है।
इसके साथ ही जिले में 400 तालाबों के गहरीकरण का कार्य किसानों को रॉयल्टी मुक्त उपजाऊ मिट्टी उपलब्ध कराते हुए किया जा रहा है। शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान के तहत सगराना में करीब तीन बीघा भूमि मुक्त कराई गई, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग दो करोड़ रुपये बताया गया है।
हाल ही में अंबेडकर रोड पर करीब चार लाख वर्ग फीट शासकीय भूमि को भी अतिक्रमण मुक्त कर नगर पालिका के स्वामित्व में लिया गया। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 500 करोड़ रुपये बताया गया है। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य शासकीय संपत्तियों का संरक्षण और उनका जनहित में उपयोग सुनिश्चित करना है।
निर्वाचन और सैनिक कल्याण में सम्मान-
निर्वाचन संबंधी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए कलेक्टर चंद्रा को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल द्वारा सम्मानित किया गया। इसी प्रकार आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे फंड में निर्धारित लक्ष्य से अधिक राशि संग्रहित करने पर उन्हें लोकभवन में सम्मान प्राप्त हुआ।
प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय संवेदनशीलता-
कलेक्टर चंद्रा की कार्यशैली में प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई देती है। जनसुनवाई के दौरान एक दिव्यांग युवक को मौके पर ही नई ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराना इसका उदाहरण है। वहीं, “हमारी आंगनवाड़ी, पोषण भी, पढ़ाई भी” अभियान के तहत स्वयं जमीन पर बैठकर बच्चों को पढ़ाने की पहल ने उनकी सहज और संवेदनशील कार्यशैली को सामने रखा।
जरूरतमंदों की समस्याओं को सुनना, उनके समाधान के लिए व्यक्तिगत रुचि लेना और प्रशासनिक तंत्र को जनहित के प्रति जवाबदेह बनाने का प्रयास उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है।
लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कलेक्टरों में शामिल-
नीमच जिले के प्रथम कलेक्टर प्रभात कुमार पाराशर और दूसरे कलेक्टर रहे अनुपम राजन के बाद हिमांशु चंद्रा उन कलेक्टरों में शामिल हैं, जिन्होंने जिले को अपेक्षाकृत लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। अनुपम राजन वर्तमान में अपर मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जिले के मुखिया के रूप में चंद्रा ने अपने दायित्वों के निर्वहन के साथ प्रशासन और आमजन के बीच संवाद व समन्वय को महत्व दिया है। विशेषकर गरीबों, पीड़ितों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्परता तथा कठिन परिस्थितियों में समाधान खोजने की उनकी कार्यशैली को जिले में चर्चा का विषय माना जाता है।
सुशासन के साथ संवेदनशीलता की पहचान-
किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की सफलता का आकलन केवल योजनाओं और उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के प्रति उसके दृष्टिकोण से भी होता है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण, जल संरक्षण, शासकीय भूमि के संरक्षण और जनसुनवाई में सहायता जैसे प्रयासों के माध्यम से कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के कार्यकाल में प्रशासनिक दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता के विभिन्न उदाहरण सामने आए हैं।
नीमच जिले में उनके नेतृत्व और कार्यशैली को सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में किए गए प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है। जनसेवा को प्राथमिकता देने, जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहने और प्रशासनिक दायित्वों को गंभीरता से निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका किसी भी जिले के विकास में महत्वपूर्ण होती है।