नीमच। केंद्र सरकार की अफीम नीति वर्ष 2026-27 के विरोध में नीमच के भीमराव अंबेडकर चौराहे पर किसानों का जमावड़ा लगा। अफीम नीति में बदलाव, उचित मूल्य और परंपरागत खेती के आधार पर पट्टे देने की मांग को लेकर किसान एकजुट हुए। इस दौरान कांग्रेस नेता श्यामलाल जोकचंद और राजकुमार अहीर ने किसानों की मांगों को उठाते हुए केंद्र सरकार, सांसद और नारकोटिक्स विभाग पर निशाना साधा।
राजकुमार ने कहा कि अफीम किसानों की मांग है कि परंपरागत खेती और औसत उपज के आधार पर किसानों को राहत दी जाए। उन्होंने डोडाचूरा की तुलाई और पट्टे देने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को 80 किलो से अधिक डोडाचूरा तौलने पर 10 आरी का पट्टा देने की बात कही जाती है, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सांसद और संबंधित विभाग पर किसानों को गुमराह करने के आरोप भी लगाए।
राजकुमार ने पट्टों के नामांतरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए लेनदेन के कथित खेल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसान नारकोटिक्स विभाग पहुंचकर डीएनसी (उप नारकोटिक्स आयुक्त) को ज्ञापन सौंपेंगे और अपनी मांगों से अवगत कराएंगे।
वहीं, किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने अफीम नीति में 4.4 मार्फिन की अनिवार्यता को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों की अफीम का मार्फिन स्तर विभाग में जांच के बाद कम आने की समस्या भी चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 1997-98 में किसानों के पट्टे काटे गए थे, उन्हें दोबारा पट्टे दिए जाएं।
जोकचंद ने सीपीएस (चीरारहित अफीम खेती) व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन किसानों ने 45 किलो उत्पादन दिया है, उन्हें भी 10 आरी का पट्टा दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अफीम नीति में किसान हितों को ध्यान में रखते हुए बदलाव करने की मांग की।