रतलाम। जिले के रावटी में प्रार्थना सभा की आड़ में आदिवासी ग्रामीणों पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाने का आरोप है। पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
ग्रामीणों के बयान और शिकायत के आधार पर मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 5 के तहत कार्रवाई की है। आरोप है कि सभा में आने वाले लोगों से कहा जाता था कि ईसाई धर्म अपनाने से उनके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।
मामला रावटी के स्टेशन रोड स्थित एक मकान का है। रविवार, 1 नवंबर को यहां प्रार्थना सभा के दौरान हिन्दू जागरण मंच कार्यकर्ता पहुंचे, उनका आरोप है कि मौके पर धर्मांतरण कराया जा रहा था।
सूचना पर पहुंची पुलिस को मकान के एक कमरे में आदिवासी महिलाएं और बच्चे बैठे मिले। इसके बाद पुलिस ने वहां मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए और मामले की जांच शुरू की।
बीमारियों और कष्ट दूर होने की बात कहकर बुलाया
पुलिस के अनुसार, फरियादी शिवा रायकवार (21) निवासी रावटी ने शिकायत में बताया कि उसे ग्रामीणों से स्टेशन रोड स्थित मोहन के किराए के मकान में प्रार्थना सभा होने की जानकारी मिली थी।
बताया गया था कि यहां शारीरिक बीमारियों और परेशानियों का निवारण किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते वह 1 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजे सभा में पहुंचा था।
चमत्कारिक पानी पिलाने का भी आरोप
शिकायत के मुताबिक, सभा में करीब 25 से 30 महिलाएं, 5 से 7 बच्चे और 8 से 10 पुरुष मौजूद थे। वहां टीकमसिंह अमलियार (35) और उसकी पत्नी नंदीबाई (32) लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
आरोप है कि नंदीबाई ने केतली से एक चम्मच पानी पिलाया और उसे दैवीय प्रसाद व चमत्कारिक पानी बताया। इसे पीने के बाद फरियादी को घबराहट और चक्कर आने लगे।
बाइबिल पढ़कर धर्म स्वीकार करने का दबाव बनाने का आरोप
फरियादी ने आरोप लगाया कि पानी पिलाने के बाद नंदीबाई और वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने बाइबिल का पाठ किया और ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।
घबराहट होने पर उसने अपने मित्र गजेंद्र सिंह राठौड़ को फोन कर जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
रावटी थाना प्रभारी मनीष डाबर ने बताया कि
शिकायत और जांच के आधार पर टीकमसिंह अमलियार, उसकी पत्नी नंदीबाई और एक अन्य महिला के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।