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November 9, 2022, 1:04 pm
KHABAR : रावटी में राम कथा साहित्य में वर्णित वनवासी चरितों पर आधारित वनवासी लीलाओं निषादराज गुह्य की प्रस्तुति दी, पढ़े खबर 

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रतलाम। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा तैयार राम कथा साहित्य में वर्णित वनवासी चरितों पर आधारित वनवासी लीलाओं निषादराज गुह्य की प्रस्तुति रावटी में 7 नवम्बर को रात्रि में ग्वालियर के हिमांशु द्विवेदी एवं साथियों द्वारा दी गई। इस दौरान पूर्व विधायक संगीता चारेल, सीईओ जनपद अलफिया खान आदि उपस्थित रहे।

लीला की कथा- 
निषादराज गुह्य में बताया कि भगवान राम ने वन यात्रा में निषादराज से भेंट की। भगवान राम से निषाद अपने राज्य जाने के लिए कहते हैं लेकिन भगवान राम वनवास में 14 वर्ष बिताने की बात कहकर राज्य जाने से मना कर देते हैं। आगे के दृश्य गंगा तट पर भगवान राम केवट से गंगा पार पहुंचाने का आग्रह करते हैं लेकिन केवट बिना पांव पखारे उन्हें नाव पर बैठाने से इंकार कर देता है। केवट की प्रेम वाणी सुन, आज्ञा पाकर गंगाजल से केवट पांव पखारते हैं। नदी पार उतारने पर केवट राम से उतराई लेने से इंकार कर देते हैं। कहते हैं कि हे प्रभु हम एक जात के हैं मैं गंगा पार कराता हूं और आप भवसागर से पार कराते हैं इसलिए उतरवाई नहीं लूंगा। लीला के अगले दृश्यों में भगवान राम चित्रकूट होते हुए पंचवटी पहुंचते हैं। सूत्रधार के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है। रावण वध के बाद श्री राम अयोध्या लौटते हैं और उनका राज्याभिषेक होता है। लीला नाट्य में श्री राम और वनवासियों के परस्पर सम्बन्ध को उजागर किया गया।

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