नीमच। मालवा-मेवाड़ अंचल के अफीम किसानों ने एक बार फिर अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। पुरानी कृषि उपज मंडी नीमच में आयोजित अफीम किसान संघर्ष समिति मालवा-मेवाड़ की महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेते हुए अफीम के समर्थन मूल्य में वृद्धि, सीपीएस (कंसन्ट्रेट ऑफ पॉपी स्ट्रॉ) पद्धति को समाप्त करने, निरस्त किए गए अफीम पट्टों की बहाली तथा मॉर्फीन कंटेंट आधारित नीति में बदलाव सहित विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 10 अगस्त को देशभर के अफीम किसान गिरफ्तारी देकर व्यापक आंदोलन का आगाज करेंगे।
चित्तौड़गढ़ की धरती पर मोदी ने दिया था आश्वासन-
बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि वर्ष 2013 में चित्तौड़गढ़ की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आज भी अफीम किसान अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष करने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम मूल्य की बात कही जाती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों ने मांग की कि घोषित मूल्य का पूरा लाभ सीधे किसानों को सुनिश्चित किया जाए।
धारा 8/29 के दुरुपयोग का लगाया आरोप-
किसानों ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि इसका दुरुपयोग कर किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि नामांतरण की प्रक्रिया को राजस्व अभिलेखों के अनुरूप सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए तथा किसानों के विरुद्ध की जा रही अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। बैठक में नारकोटिक्स विभाग के कुछ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई।
भविष्य में अफीम की खेती निजी कंपनियों के हाथों में जाने की आशंका-
अफीम किसान नेताओं ने सीपीएस पद्धति का विरोध करते हुए कहा कि इससे भविष्य में अफीम की खेती निजी कंपनियों के हाथों में जाने की आशंका है, जिससे परंपरागत अफीम किसानों के हित प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को परंपरागत अफीम खेती को संरक्षण देते हुए सीपीएस पद्धति को पूर्ण रूप से समाप्त करना चाहिए। किसानों का मानना है कि यह व्यवस्था भविष्य में खेती के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
मॉर्फीन कंटेंट को पट्टा जारी करने का आधार बनाना न्यायसंगत नहीं-
बैठक में मॉर्फीन कंटेंट आधारित नीति को भी किसानों के लिए अव्यावहारिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की गई। किसान नेताओं ने कहा कि किसी खेत में उत्पादित अफीम में मॉर्फीन की मात्रा प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जिस पर किसान का पूर्ण नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में मॉर्फीन कंटेंट को पट्टा जारी करने का आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है। इसके स्थान पर औसत (एवरेज) आधारित व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
अफीम किसानों ने उठाई ये मांगें-
किसानों ने वर्ष 1997-98 से निरस्त किए गए अफीम पट्टों सहित पात्र किसानों को शून्य प्रतिशत औसत के आधार पर पुनः पट्टे जारी करने की मांग भी उठाई। साथ ही अफीम तौल प्रक्रिया के दौरान किसानों को आने वाली समस्याओं के समाधान एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई।
10 अगस्त को देशभर के अफीम किसान देंगे गिरफ्तारी-
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार किसानों की मांगों पर विचार नहीं करती है तो 10 अगस्त को देशभर के अफीम किसान गिरफ्तारी देकर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। अफीम किसान संघर्ष समिति मालवा-मेवाड़ की इस बैठक में क्षेत्र के अनेक किसान नेताओं एवं अफीम उत्पादकों ने भाग लेकर एकजुटता का संदेश दिया तथा किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।