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July 19, 2026, 4:28 pm
KHABAR : चिता आंदोलन पर भड़के नेता प्रतिपक्ष, उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा- लाठी-गोली से नहीं संवाद से चलता है लोकतंत्र, पढे़ खबर

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भोपाल। छतरपुर में चल रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोधी में चल रही चिता आंदोलन के दमन और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद अब मध्य प्रदेश में इस पर भारी सियासी बवाल शुरू हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पुलिसिया कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी  सरकार को घेरा है। सिंघार ने आरोप लगाया है कि सरकार असहमति की हर आवाज को दबाने के लिए तानाशाही का रास्ता अपना रही है। 


फूटा उमंग सिंघार का गुस्सा, बोले- ‘डरती है सरकार’
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक के बाद एक तीखे सवाल दागते हुए लिखा कि “लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपना शासन मॉडल बना लिया है। डरती है सरकार उन प्रदर्शनकारियों से जो सरकार से नहीं डरते।”


उन्होंने इस कार्रवाई को देशव्यापी घटनाक्रमों से जोड़ते हुए कहा कि जंतर-मंतर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक और उनके साथियों को जबरन हटाया गया और केन-बेतवा लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार, कानून के उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर लड़ रहे अमित भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को पुलिस बल के दम पर गिरफ्तार कर लिया गया।


“मैं खुद आंदोलन स्थल गया था, सरकार ने संवाद के बजाय दमन चुना”
उमंग सिंघार ने अपने दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे स्वयं 14 जुलाई को आंदोलन स्थल यानि छतरपुर पहुंचे थे। वहां उन्होंने प्रभावित आदिवासियों और किसानों की पीड़ा को सुना था और उनकी इस लोकतांत्रिक लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया था। लेकिन सरकार ने प्रभावितों से संवाद का रास्ता चुनने के बजाय पुलिसिया दमन का रास्ता चुन लिया।


तत्काल रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग
सिंघार ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र लाठी और गिरफ्तारी से नहीं  बल्कि संवाद और संविधान से चलता है। लगातार हो रही ऐसी दमनकारी कार्रवाइयाँ यह साफ संकेत हैं कि देश को तानाशाही और डर के माहौल की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने अमित भटनागर सहित सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग की है और सरकार से आग्रह किया है कि वे प्रभावित लोगों की बात सुनकर केन-बेतवा परियोजना से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए।

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