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September 19, 2026, 12:31 pm
KHABAR : शासन की योजना से अनिल ने शुरू की पान की आधुनिक खेती, पॉलीहाउस में खेती से बढ़ी आमदनी, आसपास के 30-40 किसान भी हुए प्रेरित, पढ़े खबर 

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मंदसौर। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर मंदसौर जिले में कई लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय और खेती को आधुनिक रूप देकर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। भानपुरा निवासी अनिल बंबोरिया भी ऐसे ही किसान हैं। बैंक की नौकरी से मिलने वाली सीमित आय के बाद उन्होंने परिवार की पारंपरिक पान की खेती को आधुनिक तकनीक से बड़े स्तर पर शुरू किया। पॉलीहाउस में पान की खेती से उन्हें बेहतर आमदनी होने लगी है।

अनिल बंबोरिया के परिवार में लंबे समय से पान की खेती की जाती रही है। बैंक की नौकरी से होने वाली सीमित आय के कारण उन्होंने पान की खेती को बड़े स्तर पर करने का निर्णय लिया। अध्ययन के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि पॉलीहाउस में पान की खेती करने से फसल को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के साथ उत्पादन और आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

50 प्रतिशत सब्सिडी से तैयार किया पॉलीहाउस-
अनिल के पास पॉलीहाउस बनाने के लिए पर्याप्त राशि नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। विभाग की हितग्राहीमूलक योजना के तहत उन्हें 50 प्रतिशत अनुदान मिलने की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के लिए आवेदन किया, जिसके बाद उनका प्रकरण स्वीकृत हुआ। उन्हें 2.67 लाख रुपए की सब्सिडी मिली, जबकि इतनी ही राशि उन्होंने हितग्राही अंशदान के रूप में लगाई। करीब 5.34 लाख रुपए की लागत से उन्होंने वर्ष 2021-22 में पॉलीहाउस तैयार कर पान की खेती शुरू की।

पहले ही वर्ष बेहतर आय मिलने से उत्साहित अनिल ने आगामी वर्षों में फिर शासन की योजना का लाभ लेते हुए एक और पॉलीहाउस तैयार किया।

मौसम की मार से फसल को मिली सुरक्षा-
अनिल के अनुसार, पारंपरिक पान की खेती में पान की बरेजा या पनवाड़ी को तेज आंधी, बारिश और गर्मी से काफी नुकसान होता था। बारिश के दौरान जड़ों में बीमारी लगने और जड़ गलने की समस्या आती थी, जबकि सर्दियों में पत्तियां प्रभावित होती थीं। इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ नुकसान भी होता था।

उन्होंने बताया कि पॉलीहाउस में पान की खेती करने से फसल मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से काफी हद तक सुरक्षित रहती है। उनके अनुसार, पारंपरिक पनवाड़ी जहां करीब एक से डेढ़ वर्ष में प्रभावित हो जाती थी, वहीं पॉलीहाउस में पनवाड़ी 15 से 20 वर्ष तक चल सकती है। इससे उत्पादन में भी करीब डेढ़ गुना तक वृद्धि हुई है।

एक्सप्रेस-वे से दिल्ली मंडी तक पहुंच आसान-
अनिल ने बताया कि जिले में 8-लेन एक्सप्रेस-वे बनने से भी उनकी पान की फसल को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा हुई है। वे अपनी पान की फसल दिल्ली मंडी भेजते हैं। पहले परिवहन में अधिक समय लगने से फसल के खराब होने और आर्थिक नुकसान की आशंका रहती थी। अब एक्सप्रेस-वे के कारण पान की फसल अगले दिन ही दिल्ली मंडी पहुंच जाती है। इससे फसल की गुणवत्ता बनी रहती है और उन्हें बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है।

30-40 किसान पान की खेती के लिए हुए प्रेरित-
अनिल बंबोरिया की आधुनिक तरीके से पान की खेती को देखकर आसपास के करीब 30 से 40 किसान भी इससे प्रेरित हुए हैं। भानपुरा में आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर के दौरान किसानों ने कलेक्टर दिव्यांक सिंह से मुलाकात कर पॉलीहाउस में पान की खेती करने की इच्छा जताई। कलेक्टर ने किसानों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया और किसानों की मांग पर पान उत्पादक किसानों का क्लस्टर बनाने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए।

अनिल का कहना है कि किसानों को पान की खेती पॉलीहाउस में करनी चाहिए, इससे फसल को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से उन्हें अपनी पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देने का अवसर मिला है और अब उनका परिवार आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है।

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