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September 19, 2026, 10:18 am
BIG NEWS : आपके नाम पर जारी फर्जी सिम बन सकता है साइबर अपराध का माध्यम, राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी- चोरी हुए दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग से जारी हो सकते हैं फर्जी मोबाइल कनेक्शन, संचार साथी पोर्टल पर जांचें अपने नाम से जारी सभी नंबर, पढ़े खबर

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जयपुर। राजस्थान पुलिस की ओर से साइबर अपराधों की रोकथाम और आमजन को साइबर ठगी के नए तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजस्थान पुलिस की R4C साइबर क्राइम आउटरीच, अनुसंधान एवं नवाचार शाखा ने आमजन के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग से जारी होने वाले फर्जी सिम कार्ड को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

एडीजी साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने आमजन से अपील की है कि वे समय-समय पर जांच करें कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन जारी हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर ठग चोरी किए गए पहचान दस्तावेज, फोटो अथवा बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर अनधिकृत या भ्रष्ट सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से संबंधित व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके नाम पर अतिरिक्त सिम जारी करवा सकते हैं। इन सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध, फर्जी बैंक खातों अथवा ऑनलाइन ठगी में किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को बिना जानकारी के भी जांच का सामना करना पड़ सकता है।

इस तरह हो सकता है फर्जी सिम का इस्तेमाल-
पुलिस के अनुसार, साइबर ठग फर्जी ई-केवाईसी के जरिए किसी व्यक्ति के नाम पर अतिरिक्त सिम जारी करवा सकते हैं। इसके बाद इन नंबरों का इस्तेमाल ऑनलाइन भुगतान एप्लीकेशन और फर्जी बैंक खातों के संचालन में किया जा सकता है। ठगी की रकम इन खातों में भेजकर आगे स्थानांतरित की जा सकती है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए धनराशि के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

साइबर ठग बैंक स्टेटमेंट, आरबीआई अनुपालन, आयकर विभाग या कस्टम विभाग के नाम पर ई-मेल अथवा संदेश भेजकर ZIP फाइल डाउनलोड करने के लिए भी कह सकते हैं। ऐसी संदिग्ध फाइल खोलने से मोबाइल या कंप्यूटर मैलवेयर से संक्रमित हो सकता है। इसके जरिए चैट, पासवर्ड, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किया जा सकता है, जिसका आगे साइबर अपराधों में दुरुपयोग हो सकता है।

घर बैठे ऐसे जांचें, आपके नाम पर कितने सिम हैं-
भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर नागरिक अपने नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देख सकते हैं और अनधिकृत कनेक्शन की रिपोर्ट भी कर सकते हैं।

संचार साथी पोर्टल खोलें।
Know Mobile Connections in Your Name (TAFCOP) विकल्प पर जाएं।
अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी से सत्यापन करें।
आपके नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की सूची देखें।
प्रत्येक नंबर की सावधानीपूर्वक जांच करें।
कोई ऐसा नंबर मिले जो आपका नहीं है या जिसकी आवश्यकता नहीं है, तो पोर्टल के माध्यम से उसकी रिपोर्ट करें अथवा डिस्कनेक्शन का अनुरोध करें।
अनजान नंबर मिले तो तुरंत उठाएं ये कदम

यदि आपके नाम पर ऐसा मोबाइल नंबर जारी मिला है जिसका आपने कभी उपयोग नहीं किया, तो तत्काल संचार साथी पोर्टल पर उसकी रिपोर्ट करें। साथ ही संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र को इसकी जानकारी दें।

यदि मामला साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा है तो एसएमएस, स्क्रीनशॉट, ई-मेल, चैट और लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। ये सामग्री जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

सिम और केवाईसी के दौरान बरतें सावधानी

एडीजी साइबर क्राइम ने आमजन को सलाह दी है कि—

सिम कार्ड केवल अधिकृत टेलीकॉम आउटलेट से ही खरीदें।
केवाईसी या सत्यापन के दौरान मोबाइल फोन किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें।
बिना स्पष्ट कारण बार-बार बायोमेट्रिक सत्यापन कराने से बचें।
ओटीपी, पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
आधार, पैन या अन्य पहचान दस्तावेज अनजान व्यक्तियों के साथ साझा न करें।
समय-समय पर मोबाइल और एसएमएस अलर्ट की जांच करते रहें।
सिम और केवाईसी से संबंधित दस्तावेज एवं रसीद सुरक्षित रखें।
किसी अन्य व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए अपने नाम पर सिम जारी न करवाएं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

यदि आपके नाम पर फर्जी सिम जारी होने, दस्तावेजों के दुरुपयोग या साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में सूचना दें। आर्थिक साइबर धोखाधड़ी होने पर 1930 पर तुरंत शिकायत की जा सकती है।

संचार साथी पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच और अनधिकृत कनेक्शन की रिपोर्ट कर सकते हैं।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच करें और किसी भी अनजान नंबर की जानकारी मिलने पर तत्काल रिपोर्ट करें।

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