मुरैना। मुरैना के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के मिल एरिया रोड स्थित श्रीराम हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के लिए भर्ती एक महिला की इलाज के दौरान मौत का मामला सामने आया है। महिला को करीब आठ दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में उसका लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल से बाहर निकलते ही महिला ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, महिला की मौत की वास्तविक वजह और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आधिकारिक मेडिकल जांच और संबंधित स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में भी कुछ मरीजों की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के बीच कथित तौर पर समझौते कर मामले को शांत कराया गया। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यदि ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी जांच किया जाना आवश्यक होगा।
परिजनों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने पर पूर्व सीएमएचओ एवं जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ विनोद गुप्ता भी मौके पर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि बातचीत के दौरान संवेदना जताने के बजाय बहस जैसी स्थिति बनी और कथित तौर पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इस कथित बयान की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
बताया जा रहा है कि पिछले करीब 15 दिनों में मुरैना के अलग-अलग निजी अस्पतालों में चार लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। हालांकि, इन सभी मामलों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, यह संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब सवाल निजी अस्पतालों में मरीजों की निगरानी, इलाज की गुणवत्ता और गंभीर स्थिति में समय पर रेफरल व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष मेडिकल जांच के जरिए मौत की वास्तविक वजह सामने आना जरूरी है। यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।