चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारीज प्रताप नगर सेवा केंद्र पर गणेश उत्सव के अवसर पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सेवा केंद्र की संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने बुद्धि के देवता श्री गणेश जी के आध्यात्मिक स्वरूप एवं उनके जीवन से मिलने वाली प्रेरणाओं पर प्रकाश डाला।
आशा दीदी ने कहा कि पूरे भारत में गणेश उत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणेश जी के आगमन पर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर नहीं होते, बल्कि कई बाधाएं मनुष्य की अपनी कमजोरियों और कमियों के कारण उत्पन्न होती हैं। अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करने पर ही व्यक्ति निर्विघ्न जीवन की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने गणेश जी के विभिन्न अंगों में निहित आध्यात्मिक संदेशों को समझाते हुए कहा कि उनका विशाल मस्तक व्यापक एवं सकारात्मक सोच रखने की प्रेरणा देता है। छोटी आंखें दूरदृष्टि के साथ कार्य करने का संदेश देती हैं। छोटा मुख कम और सोच-समझकर बोलने की सीख देता है, जबकि बड़े कान अधिक सुनने तथा सद्विचारों एवं अच्छी बातों को ग्रहण करने की प्रेरणा देते हैं। इसी प्रकार बड़ा पेट जीवन में आने वाली परिस्थितियों को समभाव से स्वीकार कर उन्हें सहजता से आत्मसात करने का प्रतीक माना जाता है।
आशा दीदी ने कहा कि गणेश जी का स्वरूप व्यक्ति को जीवन में शांति, प्रसन्नता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। यदि मनुष्य अपनी कमजोरियों एवं नकारात्मकताओं को पहचानकर उन्हें परमात्मा को अर्पित करे और श्रेष्ठ गुणों को जीवन में धारण करे, तो वह अनेक समस्याओं से मुक्त होकर सुखी एवं संतुष्ट जीवन की ओर बढ़ सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आशा दीदी ने उपस्थित भाई-बहनों को गणेश उत्सव की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण भी किया गया।