नीमच। अफीम खेती से जुड़े राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसानों ने अफीम खेती नीति 2026-27 को देश एवं किसान हितैषी बनाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और वित्त राज्यमंत्री के नाम नीमच कलेक्टोरेट पहुंचकर अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि वे वर्ष 2008 से अफीम खेती से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अफीम लाइसेंस बढ़ाने तथा अफीम का मूल्य बढ़ाकर किसानों को राहत देने की मांग की है।
ज्ञापन में अफीम का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम किए जाने, वर्ष 1990 से निरस्त किए गए अफीम पट्टों को बहाल करने तथा लंबे समय से लाइसेंस का इंतजार कर रहे किसानों को अफीम खेती का अवसर देने की मांग की गई है। किसानों ने मार्फिन की मात्रा प्रकृति पर निर्भर होने का हवाला देते हुए 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के आधार पर पट्टे देने की मांग भी रखी।
किसानों ने राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप सभी संबंधित किसानों के नाम से नामांतरण करने, धारा 8/29 में बदलाव, सीपीएस पद्धति समाप्त कर परंपरागत लुवाई-चिराई पद्धति के तहत अफीम खेती के पट्टे बढ़ाने की मांग की। साथ ही डोडा-चूरा की सरकारी खरीद अथवा ठेका प्रणाली लागू करने और 2 हजार रुपए प्रति किलोग्राम की दर से खरीद कर उसके निस्तारण या औषधीय उपयोग की व्यवस्था करने का आग्रह किया।
ज्ञापन में वर्ष 2015 से 2026 तक नारकोटिक्स विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की गई। किसानों ने कहा कि मांगों पर उचित निर्णय नहीं होने पर वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
ज्ञापन में 24 नवंबर 2013 को चित्तौड़गढ़ में किसानों को दिए गए कथित आश्वासन का उल्लेख करते हुए परंपरागत अफीम खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों को अफीम खेती के पट्टे जारी करने की मांग की गई। किसानों ने नीति में किसान हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।