बख्तूनी। भादवी छठ के पावन अवसर पर बख्तूनी स्थित भगवान श्री देवनारायण मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन किया गया। मेले में मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री देवनारायण के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। दिनभर क्षेत्र में भक्तिमय और उत्सवी माहौल बना रहा।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है बख्तूनी का इतिहास-
स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवान श्री देवनारायण अपने घोड़े के साथ इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने यहां कुछ समय विश्राम किया था। मान्यता है कि उस समय क्षेत्र में पानी की कमी थी। भगवान देवनारायण ने अपने भाले से जमीन पर प्रहार किया, जिससे यहां एक कुएं का निर्माण हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस कुएं में आज भी वर्षभर पानी रहता है और यहां भाले से जुड़े निशान भी दिखाई देते हैं। मान्यता है कि इसके बाद भगवान श्री देवनारायण ने ऊंचाई वाले स्थान पर अपने घोड़े को लकड़ी की थूनी से बांधा था। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच की बताई जाती है। इसी घटना से इस स्थान का नाम बख्तूनी पड़ने की मान्यता भी प्रचलित है।