खरगोन। पीजी कॉलेज खरगोन में आजादी के अमृत महोत्सव के अर्न्तगत प्राचार्य डॉ. आरएस देवडा के निर्देशन तथा प्राणीशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. शैल जोशी के संक्षरण में शुक्रवार को वन्य जीव संरक्षण पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में प्रो. डॉ. केएस बघेल ने बताया कि वन्य जीव हमारे अमूल्य धरोहर इसे सजोकर रखना अति आवश्यक है अन्यथा ये विलुप्त हो जायंेगे। भारत में वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम, राष्ट्रीय वन्य जीव कार्य योजना, टाइगर परियोजना, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य, जैव-क्षेत्रीय रिजर्व कार्यक्रम आदि चल रहे हैं। इन योजनाओं के कारण कुछ प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया गया है। प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, जीन पूल की सुरक्षा के लिए फल, सब्ज़ियाँ तथा औषधियाँ प्राप्त करने, इमारती तथा जलाने वाली लकड़ी प्राप्त करने के लिए वृक्षों को काटना बंद होना चाहिए। अपनी स्थानीय सरकार को जंगलों के संरक्षण, पार्क बनाने और विनाशकारी उप नगरीय फैलाव और अन्य विकास का विरोध करने के लिए प्रोत्साहित करें। गैर-कानूनी तरीके से वन्य-जीवों के शिकार और वन्य जीव उत्पादों के अवैध व्यापार पर प्रतिबन्ध लगाना। राष्ट्रीय उद्यानों तथा अभयारणों के आस-पास के क्षेत्रों में पारिस्थितिकी का विकास, वन-विनाश पर रोक, वन क्षेत्र में वृद्धि कर वन्य-जीवों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाना। वन्य-जीव संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं का अधिक-से-अधिक क्रियान्वयन करना भी आवश्यक है। इनमें टाइगर प्रोजेक्ट, क्रोकोडाइल ब्रीडिंग एण्ड मैनेजमेण्ट प्रोजेक्ट तथा डिअर प्लानिंग प्रोजेक्ट इत्यादि। संकटापन्न वन्य-जीवों के विकास के लिए विशेष प्रयास। भारत में प्राणि-उद्यानों के प्रबन्ध की देखभाल के लिए एक केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण स्थापित किया गया है।
डॉ. रविन्द्र रावल ने बताया कि वन्य जीवो का संरक्षण अतिआवश्यक है। भारत में चीता 70 साल पहले विलुप्त हो गया था। इसे दक्षिण अफ्रिका से भारत में मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में लाकर पूनर्वास कराया गया है। साथ ही इन्हें वैज्ञानिको कील निगरानी में रखा गया है। वर्तमान में इनकी संख्याी में वृद्धि देखी गयी हैं। इसी तरह हमे अन्य विलुप्त प्रजातियांे के संरक्षण के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे। ताकि प्रकृति का जीन पुल संरक्षित रहे। इसके लिए युवा पीढी को जागरूक करना ही आज के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था। कार्यक्रम में डॉ. संध्या बटवे, प्रो. जीआर मसार, प्रो. भूरसिंह सोलंकी, प्रो. लोकेश बघेल, प्रो.पूजा महाजन, प्रियंका पटेल, आशीर्वाद गीते सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राए उपस्थित रहे।