गरोठ। ग्राम कोटड़ाबुजुर्ग में अतिप्राचीन काल से स्थित विशाल कल्पवृक्ष इस साल अधिकमास के चलते आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस कल्पवृक्ष की यहां शिव-पार्वती के जोड़े के रूप में पूजा की जाती है।
कल्पवृक्ष के नीचे शिव-पार्वती सहित पूरे परिवार की स्थापना की गई है। यह बेहद विशाल वृक्ष है जो सावन आते ही पूरा हरा-भरा हो जाता है। मान्यता है कि प्राचीनकाल से इस विशाल पेड़ पर गाय, बकरी, शेर, हाथी जैसे जानवरों के पैरों के निशान मौजूद हैं।
इस साल अधिकमास होने से कल्पवृक्ष धाम पर आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में दिनभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
कई महिलाएं यहां प्रतिदिन भजन-कीर्तन कर रही हैं। मान्यता है कि यहां आकर मन्नत मांगने वालों की मुरादें पूरी होती हैं, जिसके चलते श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार अधिकमास में कल्पवृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। इस कारण दूर-दराज से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं।