चित्तौड़गढ़। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में गुरुवार को राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली एवं लंबित प्रकरणों की तीसरी उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अप्रैल और मई माह में आयोजित पूर्व समीक्षा बैठकों के क्रम में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य पूर्व में दिए गए निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा लंबित राजस्व प्रकरणों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को सुनिश्चित करना था।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार राजस्व मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान कर आमजन को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय आमजन को न्याय दिलाने का प्रभावी माध्यम हैं, इसलिए विचारण एवं अपीलीय दोनों स्तरों पर लंबित प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी लाई जानी चाहिए।
बैठक के प्रारंभ में राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों में लंबित एवं निस्तारित प्रकरणों की स्थिति तथा की जा रही कार्रवाई का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।
मुख्य सचिव ने सभी राजस्व अधिकारियों को नियमित रूप से न्यायालयों में बैठकर प्रकरणों की सुनवाई करने और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों से जुड़े प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने, अंतिम बहस की स्थिति में पहुंचे मामलों में शीघ्र निर्णय देने तथा समन तामील जैसे कारणों से प्रकरणों को अनावश्यक लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलक्टरों को राजस्व न्यायालयों की नियमित मॉनिटरिंग एवं मासिक निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही उपखंड अधिकारियों को तहसील स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को आवश्यक राजस्व अभिलेख एवं मौका रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
मुख्य सचिव ने चारागाह भूमि, मंदिर माफी भूमि एवं सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने, स्थायी एरियर रिव्यू कमेटी की नियमित बैठकें आयोजित करने तथा भूमि स्वामित्व, सीमा निर्धारण, बंटवारा, नामांतरण एवं रास्ता संबंधी प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश भी दिए। उन्होंने राजस्व वादों में अनावश्यक स्थगन से बचने और अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में राज्य के सभी संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, राजस्व अधिकारी एवं राजस्व मंडल के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों के अधिकारियों से सीधे संवाद कर लंबित प्रकरणों की स्थिति एवं चुनौतियों की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
डीओआईटी कक्ष में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिला कलक्टर डॉ. मंजू, अतिरिक्त जिला कलक्टर दिनेश धाकड़, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।