बालाघाट। जिले की आदिवासी बाहुल्य विधानसभा बैहर की ग्राम पंचायत अडोरी के अंतर्गत आने वाले वनग्राम कुंडेकसा और बोंदारी में पिछले 15 दिनों से मौसमी बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है। इलाज के अभाव और अंधविश्वास के चलते बीते दो हफ्तों में 3 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों गाँवों में डेरा डाल दिया है और स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच की जा रही है।
हर घर में मरीज, शरीर पर लाल दाने और गले में खराश के लक्षण
बैगा आदिवासी बाहुल्य इन दोनों वनग्रामों में स्थिति यह है कि लगभग हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमार है। मरीजों में वायरल फीवर के साथ-साथ- गले में खराश, मुंह में छाले, शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। हालाँकि, जांच शिविर में किसी भी मरीज में मलेरिया के लक्षण नहीं पाए गए हैं। बीमारी फैलने की मुख्य वजह दूषित पेयजल (दूषित पानी) को माना जा रहा है, हालाँकि वास्तविक कारणों की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
अंधविश्वास और झाड़-फूंक बनी मौत की वजह
जांच के दौरान यह चिंताजनक बात सामने आई है कि स्थानीय बैगा आदिवासी ग्रामीण आधुनिक डॉक्टरी इलाज के बजाय झाड़-फूँक और अंधविश्वास पर ज्यादा भरोसा करते हैं। मृत तीनों बच्चों के परिजनों ने उन्हें किसी भी अस्पताल या निजी चिकित्सक के पास ले जाने के बजाय घर पर ही रखा और झाड़-फूँक कराते रहे। समय पर सही इलाज न मिलने के कारण तीनों बच्चों ने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर तैनात
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलप ने बताया कि वे स्वयं स्थिति का जायजा लेने गांव पहुंचे थे। “गाँव में बुखार से पीड़ित मरीज पाए गए हैं। एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) की टीम पिछले तीन दिनों से लगातार घर-घर जाकर सर्वे और जांच कर रही है। स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल किसी भी मरीज को सीएचसी या जिला अस्पताल में भर्ती करने जैसी नौबत नहीं है। सतत निगरानी रखी जा रही है।” प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम अब ग्रामीणों को अंधविश्वास छोड़कर अस्पतालों में इलाज कराने के लिए जागरूक करने का भी प्रयास कर रही है।