नीमच। हमारी सब्जी और दाल में कीड़े आ रहे हैं। 2 दिन पहले भी खाने में मक्खियां पाई गई। हमें खाने में रोटी भी कच्ची और जली हुई मिलती है। हम आज भी भूखे हैं। खाना ठीक न मिलने के कारण कुछ खाया नहीं है। इसका हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। हमारे लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट खाने की व्यवस्था कराएं। यह शिकायत लेकर मनासा नाका स्थित नीमच के शासकीय अनुसूचित जाति बालक महाविद्यालय छात्रावास के छात्र जिला कलेक्टर कार्यालय पर जनसुनवाई में पहुंचे। छात्रों ने अपनी पीड़ा स्वयं उपस्थित होकर आवेदन देकर सीईओ गुरुप्रसाद के सामने व्यक्त की। जिसे गंभीरता से लेते हुए सीईओ गुरुप्रसाद ने तुरंत आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक राकेश राठौर को जांच के आदेश दिए।
जिला संयोजक राकेश राठौड़ तुरंत एक्शन में आए। सिवेंद्र सिंह सोलंकी, बसंतीलाल राठौर और अशोक शर्मा छात्रावास पहुंचे।छात्रों से बात की और पंचनामा बनाया। खाने में पाए जाने वाली कमियों के बारे में पूर्व में भी छात्रावास के बच्चों ने अधीक्षक रमेशचंद्र पवार को अवगत कराया था, लेकिन समस्या का समाधान ना होने पर आज छात्र जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। वॉइस ऑफ एमपी की टीम ने जब छात्रावास अधीक्षक से बात की तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई शिकायत नहीं है। लाइट वगैरह की वजह से खाने में कीड़े गिर गए होंगे।यदि कोई कमी होगी तो दूर कर दी जाएगी। यहां बताते चलें कि छात्रावास में 50 बच्चों के लिए स्थान सुरक्षित है। रूटीन में करीब 30 बच्चे ही रहते हैं। यहां स्थाई रसोईया नहीं है। अमूमन चौकीदार द्वारा सहयोग देने के हिसाब से खाना बना दिया जाता है।
अधीक्षक रमेश पवार ने बताया कि बजट के रूप में एक बच्चे पर प्रतिमाह 1460 रुपए मिलते हैं। जिसमें से 10 प्रतिशत राशि वापस बच्चों के पास चली जाती है। यहां सोचने वाली बात है कि एक बच्चे को लगभग 1300 रुपए में दोनों टाइम का खाना और चाय नाश्ता कैसे संभव है। संबंधित विभाग को यह जरूर ध्यान देना होगा की समस्या का निराकरण केवल तात्कालिक ना हो छात्रों को हमेशा पौष्टिक और स्वादिष्ट आहार उपलब्ध हो। यह भी देखना दिलचस्प होगा की सीईओ गुरुप्रसाद द्वारा दिए गए जांच के आदेश का आखिर नतीजा क्या निकलता है।या यह भी केवल कागज काले करने की रस्म अदायगी बनकर तो नहीं रह जाएगा।