एशिया की सबसे बड़े अफीम एवं अल्कलॉइड प्लांट में मार्फिन पर्सेंटेज परीक्षण को लेकर जो व्यवस्थाएं चल रही है वो चौंकाने वाली है, सम्भवता आज़ादी के बाद पहली बार अफीम की सरकारी खरीद शुरू होने के चार दिन बाद यानी 5 अप्रैल अफीम परिक्षण के नतीजे आना शुरू हो जाएंगे यह नतीजे ज्यों-ज्यों आते जाएंगे इसे अफीम फैक्ट्री की वेबसाइट पर हर रोज़ पोस्ट कर दिया जाएगा ताकि अफीम किसान स्वयं वहाँ जाकर अपने नतीजे देख ले
आज मैने स्वयं अफीम फैक्ट्री में चल रहे परिक्षण को देखा एमपी और राजस्थान के करीब 45 हज़ार किसानो की अफीम आने वाले समय में यहाँ लाई जायेगी इस समय फैक्ट्री में अफीम में मार्फिन की मात्रा जांचने के कार्य में करीब 200 अधिकारी और कर्मचारी लगे है और इस पूरे कार्य की देख रेख के लिए करीब 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है जिसकी मॉनिटरिंग लगातार फैक्ट्री के जीएम नरेश बुन्देल स्वयं करते है सबसे ख़ास बात यह है की जब अफीम का कंटेनर फैक्ट्री में पहुंचता है तो सबसे पहले उस पर क्यू आर कोड लगाया जाता है फिर इस क्यू आर कोड की वापस से चैकिंग होती है की जिस किसान की अफीम है उसी का क्यू आर कोड चस्पा है की नहीं यह तस्दीक कर के एक बार फिर क्यू आर कोड लगाया जाता है और उस पर से किसान के नाम का पर्चा हटा दिया जाता है इसके बाद यह अफीम का कंटेनर सेम्पलिंग के लिए जाता है जहा एक प्लास्टिक की थैली में सेम्पल लेकर उस पर क्यू आर कोड का पर्चा लगा दिया जाता है यहाँ एक ट्रे में कुछ सैम्पल इखट्टे हो जाने के बाद इस ट्रे को लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ लेब में ले जाया जाता है इस सेम्पल के साथ एक सीआईएसएफ का सिपाही भी साथ होता है सैम्पल का कंटेनर रूम से लेब तक का सफर स्वयं जीएम बुन्देल लाईव मॉनिटरिंग करते है उसके बाद यह लेब में जांचा जाता है और जांच का परिणाम जब कम्प्यूटर में क्यू आर कोड के साथ फीड किया जाता है तो उसे कम्प्यूटर डिकोड करता है और उसमे किसान का नाम दिखने लगता है उसके बाद यहां से नतीजे सार्वजनिक कर फैक्ट्री की वेबसाइट पर डाले जाने है जिसकी शुरुआत 5 अप्रैल से हो जायेगी
अफीम फैक्ट्री में अफीम में मार्फिन परीक्षण के लिए जो इंतज़ाम किये गए है, वो आज से पहले कभी नहीं हुए यह एक ऐसा सिस्टम बनाया गया है जिसमे न तो कोई यह जान सकता है की यह अफीम किस किसान की है और न ही सेम्पलिंग में कोई हेरफेर कर सकता है कार कोड और ब्लॉकिंग चैन का जो सिस्टम डेवेलप किया गया है यह जीएम बुन्देल की ही कोशिश का परिणाम है
आज उन्होंने ख़ास बातचीत में कहा की हमारी कोशिश है इस सिस्टम को आइडियल बनाया जाए और इसी के तहत सेम्पलिंग और परिक्षण का काम आगे भी चलता रहे ताकि किसानो की मेहनत पर सही परिणाम लाया जा सके इस समय जिस सिस्टम के तहत कार्य किया जा रहा है इसमें ज़ीरो गुंजाइश है किसी भी तरह के मेन्युपलेशन की