नीमच। सांसारिक जीवन में मनुष्य यदि भौतिक सुख-सुविधाओं का मोह छोड़कर मन को नियंत्रण में करें तो मन शांति देने वाला बनेगा। मनुष्य वही बात सुने जो मन को प्रसन्न करें। सहनशीलता की कमी होती है तो व्यक्ति को क्रोध आता है इसलिए मन को मजबूत बनाएं तो उसे क्रोध नहीं आता है। मन को हमेशा चंद्रमा और चंदन की तरह शीतल बनाना चाहिए।मन को पवित्र किए बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है।यह बात आचार्य प्रवर श्री1008 रामलाल जी महाराज साहब ने कही। वे श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ जैन नीमच के तत्वावधान में नीमच सिटी मार्ग स्थित सांवरिया जी मंदिर के समीप सुंदरम वाटिका सभागार में साधना महोत्सव के अंतर्गत दया दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग धर्म की बात तो करतें हैं। यदि मन में खोट नहीं आएं तो मन 100 प्रतिशत सही है।धर्म यदि सच्चा हो तो देवता बिन बुलाए अपने पास आ जाते हैं।जिस प्रकार बाजार में नकली नोट ज्यादा समय तक नहीं चलता है आखिर पकड़ में आता ही है उसी प्रकार नकली मन भी लंबे समय तक सुख नहीं दे सकता है। नकली को मन से हटा देंगे तो मन शांत रहेगा। धर्म कार्य को मन में आत्मसात करें तो मन कभी अशांत नहीं होगा। और कोई भी समस्या हमें परेशान नहीं करेगी। धर्म सभा में उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि महाराज ने कहा कि शत-प्रतिशत शुभ भावना के साथ पुरुषार्थ करें तो सफलता निश्चित मिलती है।सफलता असफलता का मापदंड भीतर के पुरुषार्थ पर आधारित होता है। कार्यपद्धती हमारी सद्भावना एवं लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए। सफलता अंतिम छोर नहीं पड़ाव है। यह शकुन और शांति देने वाला पूर्णता का बोधक है।लक्ष्य हमारी ताकत से ज्यादा रहना चाहिए ।जमीनी स्तर पर कार्य करें सिर्फ कल्पना नहीं करना चाहिए।सफलता के लिए शुद्ध दर्पण में अपने आप को देखने की आवश्यकता होती है क्योंकि मन ही शांति दिलाने वाला होता है। हम वही बात सुने जिससे मन में संवेग आए आवेश नहीं ,अपनी समझ को विकसित करेंगे तभी समझ से आगे बढ़ेंगे। गलत बात मन की नहीं होती है। जिसकी सहनशक्ति कम होती है तभी क्रोध आता है किसी के कुछ कहने से बुरा लगता है तो यह हमारी कमी का परिचायक है। जिससे मन शांत रहे वही कार्य करना चाहिए तभी जीवन का कल्याण हो सकता है ।
धर्म सभा में सुरुचि महाराज साहब ने महावीर महावीर गीत प्रस्तुत किया और श्रावक के 12 नियम पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रावक वस्त्र खुशबू भ्रमण सचित अच्छी जगह है मर्यादा सहित सभी नियमों का पालन करें तभी उसके जीवन का कल्याण हो सकता है। 9 तत्व का ज्ञान बिना श्रावक नहीं कहलाता है।पाप से बचने की मर्यादा मर्यादा भगवान महावीर स्वामी ने सभी को सिखाई है उसका पालन में 14 नियमों के रूप में करना चाहिए स्नान भोजन आहार गोचरी आदि की मर्यादा का पालन करना चाहिए।
धर्म सभा में हर्षित मुनि महाराज ने साधु चर्या के विभिन्न नियमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नो लोगस के जाप 9 ,नवकार की पक्की माला ज्ञान दर्शन चारित्र, लोगस याद नहीं तो सिद्धार्थ सिद्ध भगवान से सिद्धि देवें का जाप, 27 वंदना, 21 बार देवगुरु, 9 बार शुद्ध नवकार लेखन, में शुद्ध हो माला जाप, प्रतिवेदन परीक्षण, मुपती , आसन की जांच, 15 मिनट धार्मिक स्वाध्याय, शाम को साधना ,वंदामि माला 5 मिनट का जाप, महापुरुषों की याद में वंदामी, कहानियों को स्मरण में लाना, दो प्रार्थना, प्रतिक्रमण ,कक्षा, एक पेज स्वयं आत्मचिंतन का अनुभव लिखना ,क्षमा प्रार्थना ,शयन से पूर्व जाप, धन्यवाद माला ,खड़े होकर आहार ग्रहण नहीं करना, थाली धोकर पीना, झूठा नहीं छोड़ना ,12 आइटम से ज्यादा उपयोग नहीं करना, भोजन की प्रतिक्रिया नहीं करना, समस्या हो तो गुरु से निराकरण प्राप्त करना, मन अशांत हो तो शांत करना और मोबाइल का उपयोग नहीं करना आदि का पालन करते हुए साधु जीवन चर्या का एकाग्रता पूर्वक पालन करना चाहिए।
इस अवसर पर अंगुरबाला सुरेश जैन एवं सागर मल सहलोत ने शीलवृत एवं रात्रि भोज त्याग का संकल्प लिया। धर्म सभा में नीमच श्री संघ के अलावा जमुनिया, जावद ,केसुंदा ,खोर, पिपलिया मंडी, मोरवन श्री संघ के पदाधिकारी भी साधक भी सहभागी बने।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने सभी उपस्थित समाज जनों को मांगलिक श्रवण कराकर आशीर्वाद प्रदान किया।इस अवसर पर महिला मंडल ने धन्य है जिनवाणी गुरुवर धन्य है गीत प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय संयोजक महेश नाहटा ने कहा कि गुरुदेव ने पवित्र भाव के साथ साधना की ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज जनों ने आयम्बिल तप, उपवास, एकाशना आदि का संकल्प लिया।
इस अवसर पर नीमच सिटी श्री संघ के अध्यक्ष उमराव सिंह राठौड़, कोषाध्यक्ष दिलीप कटारिया,नाहर सिंह राठौड, नरेंद्र गांधी, गुणवंत सेठिया, शौकीन मुनेत सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे धर्म सभा का संचालन महेश नाहटा ने किया।गुरुदेव की धर्म सभा में किसी को भी मोबाइल लैपटॉप घड़ी कैमरा ले जाने की स्वीकृति नहीं मिलती है।इस अवसर पर त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की, अयोध्या में राम हमारे गुरु रामलाल महाराज साहब की जयघोष भी लगी